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'मेरे पति जीवित नहीं हैं इसलिए...' कांग्रेस नेता इरफान अंसारी की विवादित टिप्पणी पर भावुक हुईं सीता सोरेन

Sita Soren News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख शिबू सोरेन के छोटे बेटे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और धन शोधन मामले में जेल जाने के बाद, मुख्यमंत्री पद को लेकर परिवार में मतभेद होने पर दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन इस साल की शुरुआत में भाजपा में शामिल हुई थीं।

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सीता सोरेन।

Photo : ANI

Sita Soren News: झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता इरफान अंसारी द्वारा सीता सोरेन के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला गर्माया हुआ है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी की नेता सीता सोरेन अपने बारे में की गई टिप्पणियों पर बात करते हुए काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, जब से मेरी उम्मीदवारी की घोषणा हुई है, अंसारी मुझे निशाना बना रहे हैं। लेकिन नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने जो अपमानजनक टिप्पणी की, वह स्वीकार्य नहीं है। यह आदिवासी समुदाय की महिलाओं का अपमान है। आदिवासी समुदाय उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

बता दें, जामताड़ा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहीं सोरेन अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से एक दिन पहले संवाददाताओं को संबोधित कर रही थीं। इस सीट से कांग्रेस ने इरफान अंसारी को उम्मीदवार बनाया है। बीते गुरुवार को नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने सोरेन के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

भावुक हुईं सीता सोरेन

मीडिया से बात करते हुए सीता सोरेन काफी भावुक हो गईं। उन्होंने रोते हुए कहा, चूंकि मेरे पति जीवित नहीं हैं, इसलिए उन्होंने (अंसारी ने)...। बता दें, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख शिबू सोरेन के छोटे बेटे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और धन शोधन मामले में जेल जाने के बाद, मुख्यमंत्री पद को लेकर परिवार में मतभेद होने पर दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन इस साल की शुरुआत में भाजपा में शामिल हुई थीं। दुर्गा सोरेन, शिबू सोरेन के बड़े बेटे थे।

भाजपा करेगी विरोध

सीता सोरेन जब रो पड़ीं तो उनके साथ मौजूद नवादा से भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। कांग्रेस नेता की टिप्पणी की आलोचना करते हुए ठाकुर ने कहा कि भाजपा न केवल जामताड़ा में, बल्कि पूरे राज्य में इसका विरोध करेगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने शनिवार को अंसारी की टिप्पणी का संज्ञान लिया और झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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