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Jammu Kashmir Election Result: जम्मू-कश्मीर की इन 5 सीटों पर दांव पर दिग्गजों की साख, चुनाव परिणाम कल

Jammu Kashmir Election Result: जम्मू कश्मीर में मतदान के साथ सामने आए एग्जिट पोल्स के आंकड़ों में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन को 42 सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं भाजपा 27 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। इसके अलावा पीडीपी को 7 और अन्य के खाते में 14 सीटें जा सकती हैं।

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जम्मू कश्मीर की टॉप 5 सीटों पर सबकी नजर।

Photo : PTI

Jammu Kashmir Election Result: जम्मू कश्मीर के चुनाव परिणामों पर देशभर की नजर टिकी हुई है। अनुच्छेर 370 हटने के बाद यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को इस राज्य से काफी उम्मीदे हैं। वहीं, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियां भी यहां पूरा दमखम लगाए हुए हैं। बता पूरे जम्मू कश्मीर की करें तो यहां की 90 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में चुनाव हुए। चुनाव परिणाम 8 अक्टूबर को जारी होंगे।

चुनाव संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एग्जिट पोल में जम्मू संभाग में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है। हालांकि, कश्मीर को भी जोड़ दिया जाए तो कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन भारी दिख रहा है। पोल ऑफ पोल्स के अनुसार, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन को 42 सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं भाजपा 27 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। इसके अलावा पीडीपी को 7 और अन्य के खाते में 14 सीटें जा सकती हैं।

उमर अब्दुल्ला

नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के दिग्गज नेता उमर अब्दुल्ला दो सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। एक है गांदरबल और दूसरी बडगाम लोकसभा सीट। गांदरबल अब्दुल्ला परिवार का गढ़ रहा है तो बडगाम सीट से अबदुल्ला के खड़े होने से इस सीट के चुनाव परिणाम में लोगों की दिलचस्पी बड़ गई है। वह भी तब जब अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद अबदुल्ला ने विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया था और हाल ही में वह बारामूला लोकसभा सीट पर जेल में बंद इंजीनियर राशिद से चुनाव हार गए थे।

रविंदर रैना

जम्मू कश्मीर की हॉट सीटों में नौशहरा विधानसभ सीट भी शुमार है। यहां से भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैन को चुनाव मैदान में उतार है। यह यहां से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से पहले 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के रविंदर रैना ने यहां से चुनाव जीता था।

इल्तिजा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती पर भी सभी की नजर है। वह यहां की बिजबेहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं हैं। पहली बार चुनाव लड़ने वाली इल्तिजा मुफ्ती के लिए मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। यहां से नेशनल कांफ्रेंस के अनुभवी नेता बशीर अहमद शाह मैदान में हैं।

अल्ताफ बुखारी

जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी के चुनाव परिणामों पर भी सभी की नजर टिकी है। चन्नापुरा विधानसभा सीट से उनके मैदान में उतरने से यह हॉट सीटों में शुमार हो गई है। वह 165 करोड़ की संपत्ति के साथ ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव लड़ रहे सबसे अमीर उम्मीदवार भी हैं। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है। अल्ताफ बुखारी के अलावा यहां से पीडीपी की तरफ से मोहम्मद इकबाल ट्रंबो, भाजपा की तरफ से हिलाल अहमद वानी और नेशनल कांफ्रेंस की तरफ से मुश्ताक गुरू मुकाबले में हैं।

तारिक हमीद कर्रा

जम्मू कश्मीर की सेंट्रल शाल्टेंग विधानसभा सीट भी हॉट सीट में शुमार है। यहां से कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीर कर्रा को मैदान में उतारा है। वह राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। हालांकि, उनके लिए यहां मुकाबला आसान नहीं है। नेशनल कांफ्रेस के बाकी नेता और पूर्व विधायक मुहम्मद इरफान शाह के निर्दलीय मैदान में उतरने से यहां मुकाबला कठित हो गया है। दोनों एक दूसरे के पुराने विरोधी रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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