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Jammu Kashmir: इन मुस्लिम चेहरों पर बीजेपी ने दिखाया भरोसा, टिकट बंटवारे का गणित समझिए

Assembly Elections 2024 : जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने नई रणनीति तैयार की है। भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की छठी लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में 5 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया गया है। आपको बताते हैं कि किन-किन मुस्लिमों पर भाजपा को भरोसा है।

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भाजपा ने जारी की छठी लिस्ट।

Jammu Kashmir Chunav: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को अपनी छठी लिस्ट जारी कर दी। पार्टी ने लिस्ट में 10 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। खास बात ये है कि भाजपा ने 5 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया है। भाजपा ने ऊधमपुर पूर्व से आर एस पठानिया और मढ़ से सुरिंदर भगत को चुनावी मैदान में उतारा है।

किन मुस्लिम चेहरों पर भाजपा ने जताया भरोसा

भाजपा ने करनाह से मो. इदरीस करनाह, हंडवाड़ा से गुलाम मोहम्मद मीर, सोनावारी से अब्दुल रशीद खान, बांदीपोरा से नसीर अहमद लोन, गुरेज से फकीर मोहम्मद खान को टिकट थमाया है। इसके अलावा पार्टी ने ऊधमपुर पूर्व से आर एस पठानिया, कठुआ से डॉ. भरत भूषण, बिश्नाह से राजीव भगत, बाहु से विक्रम रंधावा, मढ़ से सुरिंदर भगत को अपना उम्मीदवार बनाया है।

जम्मू-कश्मीर में टिकट बंटवारे का गणित समझिए

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। 2014 के 10 साल बाद हो रहे चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इस कोशिश में जुटी है कि वो सत्ता के सिंहासन पर काबिज हो सके। ऐसे में मुस्लिम नेताओं को टिकट देकर भाजपा एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है।

वरिष्ठ महिलाओं को दिए जाएंगे 18 हजार रुपये

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का संकल्प पत्र जारी क‍िया था। उन्होंने बताया था कि अगर घाटी में हमारी सरकार बनती है, तो घर की सभी वरिष्ठ महिलाओं को 18 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह रकम 'मां सम्मान योजना' के अंतर्गत दिए जाएंगे। इसके अलावा, उज्‍ज्‍वला योजना के तहत महिलाओं को दो मुफ्त स‍िलेंडर प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही किसी की पढ़ाई में पैसों का अभाव बाधा न बने, इसके लिए हम सभी छात्राओं को प्रतिवर्ष तीन हजार रुपये प्रदान करेंगे।

जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बनी तो...

गृह मंत्री अम‍ित शाह ने कहा था कि अगर जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बनती है, तो वृद्ध महिलाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपए पेंशन के रूप में दिए जाएंगे। मौजूदा समय में घाटी में सभी वृद्ध महिलाओं को महज एक हजार रुपए ही पेंशन मिलती है। इसके अलावा, अम‍ित शाह ने किसानों को भी सौगात देने की बात कही। उन्होंने कहा कि घाटी में बीजेपी की सरकार बनने पर ‘किसान सम्मान निधि योजना’ के अंतर्गत प्रत‍ि वर्ष 6 हजार की जगह 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने संकल्प पत्र जारी करते हुए स्पष्ट कहा था कि एक बात हम सभी लोगों को समझ लेनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 अब इतिहास बन चुका है, इसका वर्तमान से कोई सरोकार नहीं है।

90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए तीन चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण के लिए 18 सितंबर, दूसरे चरण में 25 सितंबर, तीसरे और आखिरी चरण में 1 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। जबकि,चुनाव के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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