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Hot Seat: कितनी दिलचस्प है मछलीशहर की चुनावी लड़ाई? मैदान में कुल 12 उम्मीदवार; जानें इस सीट का इतिहास

Machhlishahr Election: उत्तर प्रदेश की मछलीशहर लोकसभा सीट पर इस बार की चुनावी लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है। इस सीट से पिछले चुनाव में 181 वोट से जीतकर सांसद चुने जाने वाले बी.पी. सरोज फिर से मैदान में हैं। आपको इस सीट के समीकरण और इतिहास से रूबरू कराते हैं।

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इस सीट पर 'सरोज'के बीच चुनावी लड़ाई।

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Election 2024: 10 साल पहले बहुजन समाज पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ने वाले भोलानाथ (बी.पी. सरोज) एक बार फिर यूपी की मछलीशहर से मैदान में हैं। 2014 में उन्होंने बसपा के टिकट पर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। भाजपा के टिकट पर 2019 में सांसद चुने जाने के बाद इस बार इसी कोशिश में होंगे कि अपनी जीत का सिलसिला को यूं ही जारी रख सकें। हालांकि उनकी राह आसान नहीं है, इस बार इस सीट से 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। आपको इस सीट का समीकरण और चुनावी इतिहास समझाते हैं।

क्या कहता है इस बार मछलीशहर का समीकरण?

पिछले दो बार से मछलीशहर लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। हालांकि पिछले चुनाव में जीत और हार का अंतर महज 181 वोट था। भाजपा ने इस सीट पर मौजूदा सांसद बी. पी. सरोज को दोबारा मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला इस बार समाजवादी पार्टी की प्रिया सरोज से हो जा रहा है। इसके अलावा बसपा ने इस सीट से कृपा शंकर सरोज को अपना उम्मीदवार बनाया है।

मथलीशहर सीट से कौन-कौन उम्मीदवार?

क्रमांकउम्मीदवार का नामपार्टी
1कृपा शंकर सरोजबहुजन समाज पार्टी
2प्रिया सरोजसमाजवादी पार्टी
3भोलानाथ (बी.पी. सरोज)भारतीय जनता पार्टी
4उर्मिलासमाज परिवर्तन पार्टी
5कमलेशआज़ाद समाज पार्टी
6ब्रिजेश कुमारपृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी
7ब्रिजेश कुमार सरोजप्रबुद्धवादी बहुजन मोर्चा
8राजेंद्र प्रसादराष्ट्र उदय पार्टी
9राम मिलनसरदार पटेल सिद्धांत पार्टी
10रंग बहादुरनिर्दलीय
11श्रवण कुमारनिर्दलीय
12सुबासनिर्दलीय

लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम

जब पिछले चुनाव में सपा और बसपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तो भाजपा के बी. पी. सरोज ने कांटे की टक्कर में महज 181 वोटों से जीत बसपा के मुंह से छीन ली थी। उन्होंने त्रिभुवन राम को पटखनी दी थी। हालांकि इस बार भी उनकी राह आसान नहीं रहने वाली है, क्योंकि उनके खिलाफ सपा ने पूर्व सांसद तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज को मैदान में उतारा है।

पार्टीउम्मीदवारवोटवोट प्रतिशत
भाजपाबी.पी सरोज488,39747.19%
बसपात्रिभुवन राम4,88,21647.17%
एसबीएसपीराज नाथ11,2231.08%
नोटाइनमें से कोई भी नहीं10,8301.05%

बीपी सरोज ने 2014 में बसपा से लड़ा था चुनाव

कभी बसपा से नाता रखने वाले बी. पी. सरोज 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ आ गए और उन्हें टिकट मिल गया। इन्होंने 2014 के चुनाव में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि उन दिनों भाजपा के पूर्व सांसद राम चरित्र निषाद ने उन्हें मात दे दी थी।

क्या कहता है इस सीट का चुनावी इतिहास

मछलीशहर लोकसभा सीट पहली बार 1962 में अस्तित्व में आई थी। अब तक यहा चार बार कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा है। जबकि चार बार जनता पार्टी, चार बार भारतीय जनता पार्टी, दो बार समाजवादी पार्टी और सिर्फ एक बार ही बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव जीता है। यहां वर्तमान में भाजपा के सांसद हैं। इस क्षेत्र के पहले सांसद गणपत राम चुने गए थे। इस सीट से सबसे अधिक बार सांसद चुने जाने का रिकॉर्ड शिव शरण वर्मा के नाम दर्ज है। अब तक के इतिहास में उनके अलावा सिर्फ एक नेता कांग्रेस नागेश्वर द्विवेदी ने ही लगातार दो बार यहां से चुनाव जीत हासिल की है। अब देखना होगा बी.पी. सरोज इस रिकॉर्ड का पीछा कर पाने में सफल होते हैं या नहीं।

कब कौन मना मछलीशहर का सांसद?

वर्षनामपार्टी
1962गणपत रामभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967नागेश्वर द्विवेदीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971नागेश्वर द्विवेदीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977राज केशर सिंहजनता पार्टी
1980शिव शरण वर्माजनता पार्टी
1984श्रीपति मिश्राभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989शिव शरण वर्माजनता दल
1991शिव शरण वर्माजनता दल
1996रामविलास वेदांतीभारतीय जनता पार्टी
1998स्वामी चिन्मयानंदभारतीय जनता पार्टी
1999चन्द्र नाथ सिंहसमाजवादी पार्टी
2004उमाकांत यादवबहुजन समाज पार्टी
2009तूफानी सरोजसमाजवादी पार्टी
2014राम चरित्र निषादभारतीय जनता पार्टी
2019बी.पी. सरोजभारतीय जनता पार्टी
उत्तर प्रदेश की मछलीशहर सीट पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होने हैं। देखना होगा कि क्या बी.पी. सरोज इस सीट से दोबारा सांसद चुने जाते हैं या नहीं। देशभर में 7 चरणों में हो रहे लोकसभा के लिए अंतिम चरण की वोटिंग 1 जून को होगी, जिसके बाद 4 जून को चुनावी नतीजे सामने आएंगे।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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