ECI PC On Bihar Assembly Polls: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग राज्य में तैयारियों की समीक्षा कर रहा है और राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर रहा है। इसी सिससिले में आज मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान चुनाव आयुक्त ने लोगों से चुनाव को एक पर्व की तरह मानते हुए वोटिंग में भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। बता दें कि बिहार के अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन रविवार को चुनाव आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा की।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने क्या-क्या कहा
- हाल ही में बिहार में मतदाता सूची सही करने का कार्य किया गया और हमारे सामने उपस्थित बूथ लेवल अधिकारियों ने न केवल अपने बूथों में मतदाता सूची सुधारने का कार्य किया, बल्कि बिहार के 90,217 बूथ लेवल अधिकारियों ने ऐसा कार्य किया जो पूरे देश में अनुकरणीय है। जैसे बिहार के वैशाली ने दुनिया को लोकतंत्र का मार्ग दिखाया, आप सब मिलकर मतदाता सूची सुधार के कार्य में देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे।
- इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भोजपुरी और मैथिली में अभिवादन किया- "हम सबसे पहिले भारत के सभे मतदाता के अभिनंदन करतानी"
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, बूथ लेवल ऑफिसर्स ने अनुकरणीय कार्य किया है। सब को कोटि कोटि आभार। वोटर लिस्ट में सुधार का काम पूरा हुआ।
SIR की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। BLO ने बहुत अच्छा काम किया है। - मतदान अवश्य करें, बिहार SIR देश के लिए प्रेरणा है। चुनाव के महापर्व को उत्सव की तरह मनाएं। मतदाताओं से छठ महापर्व और त्योहारों के तरह लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने की अपील करता हूं।
- ज्ञानेश कुमार ने कहा, हम भारत के मतदाताओं को बधाई देते हैं। सफल एसआईआर प्रक्रिया के लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं बिहार के सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे लोकतंत्र के इस पर्व को उसी उत्साह के साथ मनाएं जैसे आप छठ मनाते हैं। सभी को मतदान करना चाहिए और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
- बिहार में 22 वर्षों के बाद मतदाता सूची का शुद्धिकरण हुआ: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और आधार अधिनियम के अनुसार, आधार को जन्मतिथि, निवास प्रमाण या नागरिकता प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने गणना फॉर्म में ही आधार कार्ड मांगा था। आधार अधिनियम या जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 26 के तहत आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं है। यह वैकल्पिक है। यह आधार धारक पर निर्भर करता है। आधार अधिनियम के तहत भी, आधार कार्ड न तो निवास का प्रमाण है और न ही नागरिकता का। अगर किसी ने 2023 के बाद आधार कार्ड बनवाया है या डाउनलोड किया है, तो सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों के तहत, आधार कार्ड में ही लिखा है कि आधार कार्ड जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है... सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, और हम उस आदेश का पालन कर रहे हैं, कि आधार कार्ड स्वीकार किए जाने चाहिए। हम गणना फॉर्म में भी आधार कार्ड स्वीकार करते थे और अब भी कर रहे हैं... हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा... सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पात्रता के लिए अन्य दस्तावेज़ों की आवश्यकता हो सकती है।
अधिकारियों के साथ की बैठक
इससे पहले आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने पटना में विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों और नोडल अधिकारियों के साथ राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए समन्वय और तैयारी का आकलन करने के लिए एक बैठक की। इसे लेकर आज चुनाव आयोग अहम प्रेस कांफ्रेंस भी करने जा रहा है। कयास लग रहे हैं कि इस दौर कई अहम ऐलान हो सकते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने की बैठक
शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पटना में एक विस्तृत और व्यापक समीक्षा की थी। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद गुंज्याल और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। ईसीआई के उप निदेशक पी. पवन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, आयोग ने चुनाव योजना, ईवीएम प्रबंधन, रसद, मतदान केंद्र युक्तिकरण और बुनियादी ढांचे, चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण, जब्ती, कानून और व्यवस्था, मतदाता जागरूकता और आउटरीच गतिविधियों के हर पहलू पर आयुक्तों, आईजी, डीआईजी, डीईओ, एसएसपी, एसपी के साथ विस्तृत समीक्षा की।
सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की निगरानी पर जोर
सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने और उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। चुनाव आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों, जैसे आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन), जनता दल (यू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रतिनिधियों से बातचीत की और उनके सुझाव मांगे।
राजनीतिक दलों ने दिए सुझाव
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अधिकतम मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार छठ के बाद चुनाव कराने का आग्रह किया और कम से कम चरणों में चुनाव कराने का सुझाव दिया। बिहार जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से एक ही चरण में और छठ पूजा के ठीक बाद चुनाव कराने का आग्रह किया है ताकि राज्य के बाहर रहने वाले लोग भी अपना वोट डाल सकें। बिहार में वर्ष 2020 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हुए थे। जेडीयू की सहयोगी भाजपा ने भी कहा कि चुनाव एक या दो चरणों में होने चाहिए। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मतदान केंद्रों पर वोट डालने आईं 'पर्दा नशीन' (बुर्का पहने महिलाओं) की पहचान करने का आग्रह किया है। पत्रकारों से बात करते हुए, भाजपा के बिहार प्रमुख दिलीप जायसवाल ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग से पिछड़े इलाकों में अर्धसैनिक बलों के मार्च निकालने का भी आह्वान किया है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा जल्द
चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा जल्द ही किए जाने की उम्मीद है। यह समीक्षा 30 सितंबर को बिहार विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद की जा रही है, जो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पूरा होने का प्रतीक है। चुनाव आयोग के अनुसार, अंतिम सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ है, जबकि इस साल 24 जून तक यह संख्या 7.89 करोड़ थी। बिहार में चुनावी लड़ाई मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।
किसके पास कितनी सीटें?
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में, एनडीए के पास वर्तमान में 131 सीटें हैं - भाजपा 80, जेडी(यू) 45, हम (एस) 4 और दो निर्दलीय - जबकि महागठबंधन के पास 111 सीटें हैं, जिसमें आरजेडी 77, कांग्रेस 19, सीपीआई (एमएल) 11, सीपीआई (एम) 2 और सीपीआई 2 शामिल हैं। राज्य भर में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है और उच्च-दांव वाले चुनाव से पहले अभियान तेज हो गए हैं। (एएनआई)
