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मैं भी बना सकता था कोई 'शीश महल', पीएम मोदी ने क्यों कह दिया ऐसा? पढ़ें 10 बड़ी बातें

Sheesh Mahal: पीएम मोदी ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी की सरकार पर जमकर प्रहार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों-इशारों में तंज कसते हुए कहा कि मैं भी कोई ‘शीश महल' बना सकता था लेकिन देशवासियों को पक्का घर मिले, यही मेरा सपना।

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पीएम मोदी ने केजरीवाल और आप को जमकर कोसा।

PM Modi Slams Arvind Kejriwal: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आज तक उन्होंने अपने लिए कोई घर नहीं बनाया और अगर वह चाहते तो अपने लिए भी एक ‘शीश महल’ बना सकते थे लेकिन देशवासियों को पक्का घर मिले, यही उनका सपना रहा है। राजधानी दिल्ली के अशोक विहार स्थित स्वाभिमान अपार्टमेंट में इन-सीटू स्लम पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत झुग्गी झोपड़ी (जेजे) समूहों के निवासियों के लिए 1,675 नवनिर्मित फ्लैटों सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विगत 10 सालों में उनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने चार करोड़ से अधिक गरीबों के घर का सपना पूरा किया।

1). 4 करोड़ से अधिक लोगों का सपना पूरा

उन्होंने कहा, 'देश भलीभांति जानता है कि मोदी ने कभी अपने लिए घर नहीं बनाया, लेकिन बीते 10 वर्षों में 4 करोड़ से अधिक लोगों का सपना पूरा किया है। मैं भी कोई शीश महल बना सकता था, लेकिन मेरे लिए तो मेरे देशवासियों को पक्का घर मिले, यही सपना था।' उल्लेखनीय है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी’ छवि पर हमला करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनके पुराने सिविल लाइंस स्थित आवास को ‘शीश महल’ के रूप में पेश कर रही है। भाजपा का आरोप है कि आवास को कथित ‘शीश महल’ में तब्दील करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए।

2). आप सरकार को बताया ‘आपदा’ सरकार

प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार को ‘आपदा’ सरकार करार दिया और आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय राजधानी के लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक ठीक से नहीं दे रही है।

3). लाखों दिल्लीवासियों की परेशानी गिनाई

उन्होंने कहा, 'इसके चलते लाखों दिल्लीवासियों को बहुत परेशानी हो रही है। घर बनाने में लाखों रुपए लगाने के बाद भी अगर सीवर ना हों, नालियां टूटी हों, गली में गंदा पानी बहता हो तो दिल्ली के लोगों का दिल दुखना बहुत स्वाभाविक है।'

4). झूठी कसमें खा कर अपने लिए शीश महल बनवाया

केजरीवाल पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'जो लोग दिल्ली के लोगों से विश्वासघात करके, झूठी कसमें खा कर अपने लिए शीश महल बनवा लेते हैं...जब यह आपदा जाएगी, भाजपा आएगी तो इन सारी समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।'

5). स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पहुंचाया नुकसान

प्रधानमंत्री ने दिल्ली सरकार पर स्कूली शिक्षा व्यवस्था को भी ‘बहुत नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि हालत यह है की समग्र शिक्षा अभियान के तहत जो पैसे भारत सरकार ने दिए, उसके आधे भी वह खर्च नहीं कर सकी।

6). दिल्ली के बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है

उन्होंने कहा, 'दिल्ली में ऐसी सरकार बैठी है, जिसको दिल्ली के बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है...भारत सरकार के दिए आधे पैसे भी पढ़ाई के लिए खर्च नहीं कर पाए।'

7). 10 वर्षों से एक बड़ी ‘आप-दा’ से घिरी है दिल्ली

उन्होंने केजरीवाल पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'बीते 10 वर्षों से दिल्ली एक बड़ी ‘आप-दा’ से घिरी है। अन्ना हजारे जी को सामने करके कुछ कट्टर बेईमान लोगों ने दिल्ली को आप-दा में धकेल दिया।'

8). शराब के ठेकों में घोटाला हुआ

मोदी ने आप नेताओं पर ‘खुले आम’ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि इसके साथ ही वे उसका महिमामंडन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि 'शराब के ठेकों में घोटाला, बच्चों के स्कूल में घोटाला, गरीबों के इलाज में घोटाला, भर्तियों के नाम पर घोटाला... ये लोग दिल्ली के विकास की बात करते थे, लेकिन ये लोग आप-दा बनकर दिल्ली पर टूट पड़े हैं।'

9). एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी

उन्होंने कहा, 'एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी। यह आप... यह आप-दा दिल्ली पर आई है। इसलिए दिल्ली वालों ने आप-दा के विरुद्ध जंग छेड़ दी है। दिल्ली का वोटर, दिल्ली को आपदा से मुक्त करने की ठान चुका है। दिल्ली का हर नागरिक कह रहा है, दिल्ली का हर बच्चा कह रहा है, दिल्ली की हर गली से आवाज आ रही है कि आप-दा को नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे।'

10). ‘आप-दा को नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे’

प्रधानमंत्री ने कई बार ‘आप-दा को नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे’ के नारे लगाए और उन्हें इसमें लोगों का भी साथ मिला।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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