इलेक्शन

Delhi MCD Election 2022: दिल्ली निगम चुनाव का 2024 कनेक्शन, BJP-AAP-कांग्रेस का टिका भविष्य

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 2, 2022, 03:58 PM IST

Delhi MCD Election 2022 (दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022): करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना बजट वाला दिल्ली नगर निगम (MCD),मुंबई के बाद देश का दूसरा सबसे अमीर नगर निगम है। इसके अलावा देश की राजधानी होने के नाते इसका सीधे केंद्र और राज्य की सत्ता से कनेक्शन है। एमसीडी के पास ऐसे अधिकार है जो न केवल राज्य सरकार के लिए बेहद अहम है। बल्कि केंद्र में बैठी कोई भी सरकार, अपनी सत्ता दिल्ली नगर निगम में चाहती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • भाजपा पिछले दो चुनावों में 36 फीसदी वोट लेकर सत्ता पर काबिज है।
  • आम आदमी पार्टी 2024 के लोक सभा चुनाव के पहले एमसीडी में जीत हासिल करना चाहती है।
  • भाजपा और आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के प्रचार में उतरने से लड़ाई रोचक हो गई है।

Delhi MCD Election 2022 (दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022): गुजरात, हिमाचल विधानसभा चुनावों के बीच एक ऐसे इलेक्शन की चर्चा है, जो कहने को तो नगर निगम का चुनाव है, लेकिन उसकी अहमियत किसी भी विधान सभा चुनाव से कम नहीं हैं। हालात यह कि पार्षदों के चुनाव के लिए केंद्र में बैठी भाजपा ने जहां केंद्रीय मंत्रियों की टीम उतार दी है। वही पहली बार नगर निगम की सत्ता हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली-पंजाब के सरकार के मंत्रियों के मैदान में उतार दिया है। एक तरफ जहां भाजपा अपनी 15 साल से चली आ रही सत्ता को बचाना चाहती है, वहीं आम आदमी पार्टी पहली बार MCD Election(दिल्ली नगर निगम चुनाव) में जीत हासिल करने के लिए सारी कवायद कर रही है।

क्यों इतना अहम है MCD Election

करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना बजट वाला दिल्ली नगर निगम (MCD),मुंबई के बाद देश का दूसरा सबसे अमीर नगर निगम है। इसके अलावा देश की राजधानी होने के नाते इसका सीधे केंद्र और राज्य की सत्ता से कनेक्शन है। यही नहीं एमसीडी के पास ऐसे अधिकार है जो न केवल राज्य सरकार के लिए बेहद अहम है। बल्कि केंद्र में बैठी कोई भी सरकार, अपनी सत्ता दिल्ली नगर निगम में चाहती है।

एमसीडी के पास गलियों से लेकर पॉश इलाके तक में काम करने के अधिकार हैं। साथ ही स्कूल, अस्पताल,पार्किंग, बाजार से संबंधित अधिकार भी उसके पास है। ऐसे में हर राजनीतिक दल वहां अपनी स्थिति मजबूतकर राज्य और केंद्र की सत्ता पर नजर रखता है।

इस बार 2024 का टेस्ट

इस बार का एमसीडी चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यह राष्ट्रीय राजनीति पर बहुत ज्यादा असर डालेगा। क्योंकि 2024 के लोक सभा चुनाव से पहले दिल्ली में यह आखिरी चुनाव हैं। ऐसे में जो भी दल जीतेगा, उसे 2024 के लिए दिल्ली की जनता का मूड समझने में मदद मिलेगी। इसलिए भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए यह चुनाव बेहद अहम हैं। पिछले 2 बार से भाजपा यहा पर 36 फीसदी वोट जीत कर सरकार बनाती रही है। लेकिन इस बार पहली बार एकीकृत एमसीडी के चुनाव हैं, साथ ही परिसीमन के बाद कई अहम बदलाव हुए हैं। इसे देखते हुए यह चुनाव भाजपा के कामों का भी टेस्ट होगा। इस बार 250 सीटों के लिए चुनाव होगा। वोटिंग 4 दिसंबर को है और परिणाम 7 दिसंबर को आएंगे।

राजनीतिक दल (2017)सीटें
भाजपा181
आम आदमी पार्टी48
कांग्रेस27

दिल्ली और एमसीडी अलग-अलग सरकार से हितों का टकराव

अभी दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की सरकार है। वहीं एमसीडी में भाजपा की सरकार है। ऐसे में कई मुद्दों पर दोनो राजनितिक दलों में टकरार दिखती है। शिक्षा और स्वास्थ्य के मामलों पर दोनों दलों के बीच टकराव नजर आता है। असल में एमसीडी के पास प्राइमरी शिक्षा के संचालन का अधिकार है, वहीं दूसरे ग्रेड के स्कूलों का संचालन का अधिकार दिल्ली सरकार के पास है। इसी तरह दिल्ली सरकार बड़े अस्पतालों का संचालन करती है। टैक्स कलेक्शन में भी एमसीडी और दिल्ली सरकार के अधिकार बंटे हुए हैं।

एमसीडी बॉर्डर एरिया में टोल टैक्स लेती है, वहीं लगान के अधिकार भी एमसीडी के पास हैं। जबकि दिल्ली सरकार एक्साइज ड्यूटी, सेवाएं और दूसरी विभागों के टैक्स लेती है। इसी तरह दिल्ली में सड़क बनाने का अधिकार दोनों के पास है। आम तौर पर कम चौड़ी सड़कों का निर्माण एमसीडी के पास है। ऐसे में अलग-अलग सरकार होने पर टकराव की स्थिति भी बनती है।

भाजपा-आप-कांग्रेस के लिए क्यों अहम

अगर एमसीडी के नतीजे भाजपा की ओर जाते हैं तो उसे 2024 के लोक सभा से लेकर विधानसभा चुनावों के लिए बूस्ट मिल जाएगा। वहीं अगर उसकी हार होती है, तो विपक्षी दलों के लिए बड़ा बूस्ट होगा।

इन चुनावों में अगर आम आदमी पार्टी जीतती है तो न केवल दिल्ली में उसकी पकड़ मजबूत होगी, बल्कि वह राष्ट्रीय स्तर पर यह दावा करेगी कि भाजपा को वह हरा सकती है।

इसी तरह कांग्रेस जीतती है तो उसके लिए एमसीडी चुनाव संजीवनी का काम करेंगे, वहीं अगर वह हारती है तो फिर दिल्ली में उसका भविष्य बेहद कमजोर हो हो जाएगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article