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Exit Poll पर कांग्रेस का यू-टर्न, डिबेट में लेगी हिस्सा; INDI गठबंधन में शामिल पार्टियों के साथ चर्चा के बाद लिया फैसला

Exit Polls 2024: एग्जिट पोल डिबेट में हिस्सा लेने को लेकर कांग्रेस ने यू-टर्न ले लिया है। एक दिन पहले उसने डिबेट में भाग न लेने की घोषणा की थी। एग्जिट पोल 1 जून को चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के बाद सामने आ रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे लेकर जानकारी साझा की है।

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कांग्रेस ने मारी पलटी।

Photo : Times Now Digital

Congress on Exit Polls: कांग्रेस ने कहा कि वह एग्जिट पोल बहस (डिबेट) में हिस्सा लेगी, एक दिन पहले उसने डिबेट में भाग न लेने की घोषणा की थी और इसे "अटकलबाजी और टीआरपी के लिए झगड़ा" करार दिया था। लोकसभा चुनाव में मतदान के आखिरी दिन शनिवार को इंडिया ब्लॉक पार्टियों के साथ बैठक के बाद कांग्रेस ने यू-टर्न लिया।

Exit Poll के डिबेट में हिस्सा लेगी कांग्रेस

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि इंडिया ब्लॉक पार्टियों ने "पूर्व निर्धारित एग्जिट पोल" पर भारतीय जनता पार्टी और उसके "तंत्र" को "बेनकाब" करने का फैसला किया है। खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "इंडिया गठबंधन की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एग्जिट पोल्स से संबंधित भाजपा व उसके तंत्र को बेनक़ाब करना आवश्यक है। एग्जिट पोल्स की डिबेट्स में भाग लेने के पक्ष और विरोध के तमाम पहलुओं पर चर्चा के पश्चात सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि इंडिया गठबन्धन के तमाम सदस्य दल एग्जिट पोल्स की डिबेट्स में हिस्सा लेंगे।"

अंतिम चरण के मतदान के बाद एग्जिट पोल

एग्जिट पोल 1 जून को चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के बाद सामने आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो चुके हैं। अंतिम चरण के लिए 1 जून को मतदान हुआ। आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 57 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। शुक्रवार को इससे पहले खेरा ने एक्स पर घोषणा की, "Exit Polls में भाग न लेने के कारण पर हमारा बयान मतदाताओं ने अपना वोट डाल दिया है और उनका फैसला सुरक्षित है। परिणाम 4 जून को आएंगे। उससे पहले, हमें टीआरपी के लिए अटकलों और झगड़े में शामिल होने का कोई कारण नहीं दिखता। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस Exit Polls पर बहस में भाग नहीं लेगी। किसी भी बहस का उद्देश्य लोगों को सूचित करना होना चाहिए। हम 4 जून से बहस में खुशी से भाग लेंगे।"

खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक

राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष के नेतृत्व वाले भारतीय राष्ट्रीय विकास समावेशी गठबंधन (इंडिया) ब्लॉक की बैठक चल रही है। टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही कहा था कि वह राज्य में चुनावों और चक्रवात रेमल के प्रभाव की समीक्षा के कारण बैठक में शामिल नहीं होंगी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी बैठक में शामिल नहीं हुईं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीआई-एम, सीपीआई, डीएमके, जेएमएम, आप, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर चर्चा के लिए एकत्र हुए।

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है, जबकि विपक्ष गठबंधन INDIA में शामिल पार्टियां भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश में जुटी रही।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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