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Haryana Election: बागियों के खिलाफ कांग्रेस का एक्शन जारी, 10 और नेताओं को दिखाया बाहर का रास्ता

Haryana Assembly Elections 2024: बागियों के खिलाफ कांग्रेस एक्शन का सिलसिला जारी है। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 10 और नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

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हरियाणा में बागियों के खिलाफ कांग्रेस का एक्शन।

Photo : Twitter

Congress continues its action against rebel leaders: हरियाणा विधानसभा चुनाव के बीच बागियों के खिलाफ एक्शन सिलसिला का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच कांग्रेस ने एक बार फिर हरियाणा में बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दिया है। कांग्रेस ने अब हरियाणा के 10 नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

कांग्रेस ने 10 बागी नेताओं को पार्टी से किया निष्कासित

इन सभी 10 नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इनमें से ज्यादातर नेता बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई नेताओं के बागी हो जाने के बाद अब कांग्रेस को इन पर एक्शन लेने पर मजबूर होना पड़ा है।

इससे पहले 13 दिग्गजों के खिलाफ लिया था एक्शन

कांग्रेस ने इससे पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त 13 नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इनमें कई निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।

इन नेताओं को कांग्रेस ने पार्टी से निकाला था

कांग्रेस ने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता पर अंकुश लगाने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से छह साल के लिए निष्कासित किया जा रहा है। हरियाणा की कांग्रेस इकाई के प्रमुख उदय भान द्वारा जारी पार्टी आदेश के अनुसार, गुहला अनुसूचित जाति (एससी) सुरक्षित सीट से नरेश धांडे, जींद से प्रदीप गिल, पुंडरी से सज्जन सिंह ढुल और सुनीता बट्टन, नीलोखेड़ी-एससी (सुरक्षित) से राजीव मामूराम गोंदर और दयाल सिंह सिरोही, पानीपत ग्रामीण से विजय जैन, उचाना कलां से दिलबाग सांडिल, दादरी से अजीत फोगाट, भिवानी से अभिजीत सिंह, बवानी खेड़ा-एससी (सुरक्षित) से सतबीर रतेरा, पृथला से नीटू मान और कलायत से अनीता ढुल बड़सीकरी को निष्कासित कर दिया गया है।

बागियों ने बढ़ाई कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें

हरियाणा में पांच अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी द्वारा टिकट नहीं मिलने से कई नेता नाराज थे, लेकिन बाद में पार्टी इनमें से कई की नाराजगी दूर करने में सफल रही थी। हरियाणा में कांग्रेस-बीजेपी के बीच इस बार जबरदस्त मुकाबला है। कांग्रेस को 10 साल बाद वापसी की पूरी उम्मीद है। इसी के चलते पार्टी में भी टिकटों के लिए घमासान मचा रहा और कई नेताओं ने निर्दलीय ही मैदान पर उतरने का फैसला किया। इसने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

चुनाव से पहले और इसके दौरान कई कांग्रेस नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। इसमें खुद पूर्व सीएम भूपिंदर हुड्डा के खासमखास नेता भी शामिल हैं। राज्य में पांच अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और आठ अक्टूबर को मतगणना होगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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