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Jharkhand Election: चिराग पासवान ने बताया, NDA के साथ या अकेले लड़ेंगे झारखंड चुनाव; जानें प्लान

Jharkhand Assembly Elections: चिराग पासवान ने बिहार के बाद झारखंड में अपनी पार्टी को मैदान में उतारने का मन बना लिया है। सवाल ये है कि क्या उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल होगी? केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि जल्द इस पर फैसला होगा कि झारखंड चुनाव राजग के साथ लड़ेंगे या अकेले।

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चिराग पासवान।

Chirag Paswan Plan for Jharkhand: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) झारखंड में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है और इस बारे में जल्द निर्णय लिया जाएगा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ।

चिराग पासवान ने झारखंड के लिए बनाया खास प्लान

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि उन्होंने रविवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की जहां झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि बैठक बहुत सकारात्मक रही। पासवान ने यहां फिक्की के एक समारोह से इतर संवाददाताओं से कहा, 'मैंने कल गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हमने देश में मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा की। झारखंड को लेकर भी चर्चा हुई।'

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने हाल में हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में भाग नहीं लिया, लेकिन भाजपा का समर्थन किया।

कब तक झारखंड का प्लान तैयार करेंगे चिराग?

चिराग पासवान ने कहा, 'झारखंड में भी मेरी सोच यही है कि हम लोग राजग के साथ मिलकर चुनाव लड़ें।' उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय 2-4 दिन में लिया जाएगा। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव इस साल के अंत में होने हैं और जल्द ही तारीखों की घोषणा की जा सकती है।

उन्होंने कहा, 'प्रदेश इकाई चुनाव लड़ना चाहती है। देखते हैं, हम गठबंधन के तहत लड़ते हैं या अकेले, स्थिति कैसी बनती है। केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मेरी बहुत सकारात्मक बैठक हुई। अगले कुछ दिन में तस्वीर साफ हो जाएगी।'

चिराग पासवान ने झारखंड में कितनी सीट मांगी हैं?

जब पासवान से पूछा गया कि उनकी पार्टी ने कितनी सीट मांगी हैं तो उन्होंने कहा कि वह गठबंधन के सिद्धांतों के अनुरूप यह बात सार्वजनिक नहीं करेंगे। हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए ‘एग्जिट पोल’ के परिणामों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने विश्वास जताया कि राजग सरकार बनाएगा।

अपने दिवंगत पिता राम विलास पासवान को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने की मांगों पर चिराग पासवान ने कहा कि एक बेटे के रूप में उनकी हमेशा यह इच्छा रही है। उन्होंने कहा, 'कोई चीज अगर मांग के मिली तो क्या मिली।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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