Sharad Pawar: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को महाराष्ट्र में 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर अहम खुलासा किया। चुनाव के बाद भाजपा से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली (अविभाजित) शिवसेना को दूर करने के लिए भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी और यह कदम सफल साबित हुआ। अमरावती में मराठी समाचार चैनल एबीपी माझा से बात करते हुए पवार ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य भाजपा को सत्ता से दूर रखना था।
पवार बोले, भाजपा के साथ जाने की नहीं थी योजना
उस समय भाजपा के साथ उनके गुप्त संबंधों की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा कि भाजपा के साथ जाने की मेरी कभी कोई योजना नहीं थी। मैं 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद उसे सत्ता से दूर रखना चाहता था। मैंने केवल भाजपा को एनसीपी का समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं किया। पवार ने कहा कि योजना धीरे-धीरे शिवसेना को भाजपा से अलग करने की थी। मैं इसमें सफल रहा। अब मैं और उद्धव ठाकरे राज्य में एक साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। भाजपा के हाथों में सत्ता देना देश के हित में नहीं है।
2014 में भाजपा ने जीती थी 122 सीटें
बता दें कि 2014 के चुनाव में 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा ने 122 सीट जीती थीं और 144 के बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे थी। कई दशकों से सहयोगी रहे भाजपा और अविभाजित शिवसेना ने 2014 का चुनाव अलग-अलग लड़ा था। सरकार गठन को लेकर गतिरोध के बीच उस समय पवार ने कहा था कि एनसीपी भाजपा को बिना शर्त समर्थन देगी। एक महीने बाद शिवसेना देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हो गई लेकिन दोनों सहयोगियों के बीच कई मुद्दों पर विवाद जारी रहा।
2019 के चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला, लेकिन मुख्यमंत्री पद ढाई-ढाई साल के लिए साझा करने को लेकर असहमति के बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए। उसके बाद से दोनों दल साथ नहीं आए हैं।
