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समझ से बाहर पप्पू यादव की पॉलिटिक्स? पहले पूर्णिया से किया निर्दलीय नामांकन, अब बोले- 'मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही'

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 13, 2024, 08:59 PM IST

Pappu Yadav: पप्पू यादव ने पूर्णिया में पैदा हुए हालातों के लिए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि मैं कभी नहीं चाहता था कि पूर्णिया में पश्चिम बंगाल और केरल की तरह इंडिया गठबंधन के घटक एक-दूसरे से लड़ते दिखें लेकिन लालू प्रसाद ने मेरे साथ अन्याय किया।

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पप्पू यादव

Photo : Twitter

Pappu Yadav: बिहार में हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव की पॉलिटिक्स किसी की भी समझ से बाहर है। एक तरफ उन्होंने पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है तो दूसरी तरफ उन्होंने खुद को कांग्रेस का सच्चा सिपाही कहा है। शनिवार को पप्पू यादव ने कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही हैं ओर आखिरी सांस तक इसी दल के साथ रहेंगे।

बता दें, पप्पू यादव हाल ही में अपनी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया था। उन्होंने कहा, मैं कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का एक सिपाही हूं। मैं अपनी आखिरी सांस तक वैचारिक तौर पर कांग्रेस पार्टी के साथ रहूंगा। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा मेरे खून में है।

लालू यादव ने मेरे साथ अनन्याय किया

पप्पू यादव ने पूर्णिया में पैदा हुए हालातों के लिए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि मैं कभी नहीं चाहता था कि पूर्णिया में पश्चिम बंगाल और केरल की तरह इंडिया गठबंधन के घटक एक-दूसरे से लड़ते दिखें लेकिन लालू प्रसाद ने मेरे साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा, जब भी मैंने चुनाव लड़ा, उन्होंने मेरा विरोध किया। अपने प्रति उनकी इस नफरत को समझने में मैं असमर्थ रहा हूं, उन्होंने मेरे लिए बाधाएं खड़ी की।

पूर्णिया मेरे लिए जीवन-मृत्यु का सवाल

पप्पू यादव ने कहा, लालू यादव ने मेरी पत्नी रंजीत रंजन के साथ भी ऐसा ही किया है, लेकिन मैंने पूर्णिया के लोगों से वादा किया है कि मैं उनके लिए लड़ूंगा। यह मेरे लिए जीवन और मृत्यु का सवाल बन गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें राजद की ओर से पूर्णिया के बजाए मधेपुरा और सुपौल से चुनाव लडने की पेशकश की गयी पर उन्हें यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं था। पप्पू यादव ने कहा, मैं अपनी पहचान और विचारधारा से समझौता नहीं कर सकता। पूर्णिया मेरी कर्मभूमि है और मैं इसे आखिरी सांस तक नहीं छोड़ूंगा। मैं जीवन भर भ्रष्टाचार से लड़ने और सीमांचल तथा कोसी क्षेत्र के विकास के लिए कड़ी मेहनत करूंगा।

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