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छपरा में फिर खिलेगा 'कमल' या पलटेगा पासा? अब तक हो चुके 17 चुनावों में किसका कैसा रहा हाल; समझें समीकरण

Bihar Elections 2025: छपरा विधानसभा सीट सारण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। छपरा न सिर्फ एक प्रमुख शहरी केंद्र है, बल्कि यह सारण प्रमंडल का मुख्यालय भी है। चुनाव में छपरा की जनता ने अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं को मौका दिया। पिछले दो चुनाव में यह सीट भाजपा के पास रही है, लेकिन पूर्व में इस सीट पर कांग्रेस का भी दबदबा रह चुका है।

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छपरा में कौन मारेगा बाजी?

Photo : Times Now Digital

Bihar Elections 2025: बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक छपरा विधानसभा सीट (Chapra Assembly Seat) ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव में छपरा की जनता ने अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं को मौका दिया। पिछले दो चुनाव में यह सीट भाजपा के पास रही है, लेकिन पूर्व में इस सीट पर कांग्रेस का भी दबदबा रह चुका है। इस बार के चुनाव में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाना चाहेगी।

छपरा सीट का राजनीतिक इतिहास (Chapra Seat History)

1957 में गठन के बाद से छपरा विधानसभा सीट पर अब तक 17 बार चुनाव हो चुके हैं। 1957 में हुए पहले चुनाव में यहां कांग्रेस के राम प्रभुनाथ सिंह ने चुनाव जीता था। कांग्रेस ने यहां चार बार जीत हासिल की है, आखिरी जीत 1972 में मिली। छपरा की जनता ने 2005 के चुनाव में जदयू के राम परवश राय को चुनाव जिताकर विधानसभा भेजा। 2010 में यह सीट भाजपा के खाते में आई, लेकिन 2014 के उपचुनाव में राजद के रणधीर कुमार सिंह इस सीट से जीत गए। 2015 के आम चुनाव में भाजपा ने वापसी की और 2020 में भाजपा के सीएन गुप्ता यहां से लगातार दूसरी बार विधायक बने।

कब और कौन छपरा सीट से रहा विधायक (Chapra MLAs List)

सालविधायकपार्टी
1957राम प्रभुनाथ सिंहकांग्रेस
1957जगलाल चौधरीकांग्रेस
1962सुंदरी देवीकांग्रेस
1967उदय प्रताप एन सिंहजनसंघ
1969जनक यादवप्रजा सोशलिस्ट पार्टी
1972जनक यादवकांग्रेस
1977मिथलेश कुमार सिंहजनता पार्टी
1980जनक यादवजनता पार्टी
1985जनक यादवस्वतंत्र राजनीतिज्ञ
1990उदित रायस्वतंत्र राजनीतिज्ञ
1995उदित रायजनता दल
2000उदित रायराजद
2005राम परवश रायजदयू
2005राम परवश रायजदयू
2010जनार्दन सिंह सिग्रीवालभाजपा
2014रणधीर कुमार सिंहराजद
2015सीएन गुप्ताभाजपा
2020सीएन गुप्ताभाजपा

जाति समीकरण साधने की होगी कोशिश

छपरा विधानसभा सीट पर वैश्य, यादव और मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनके अलावा ब्राह्मण, राजपूत, कुशवाहा, पासवान और ईबीसी वर्ग के मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है, जो चुनाव परिणामों पर अपना असर छोड़ती है। छपरा विधानसभा सीट सारण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। छपरा न सिर्फ एक प्रमुख शहरी केंद्र है, बल्कि यह सारण प्रमंडल का मुख्यालय भी है। शहर की भौगोलिक स्थिति इसे और भी विशेष बनाती है। यह घाघरा नदी के उत्तरी तट पर बसा है और गोरखपुर-गुवाहाटी रेलमार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है। यहां से गोपालगंज और बलिया की ओर रेल लाइनें जाती हैं, जिससे यह व्यापार और आवागमन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

पिछले चुनाव में उम्मीदवारों का कैसा रहा प्रदर्शन (Chapra Election Results 2020)

पार्टीउम्मीदवारवोट
भाजपासीएन गुप्ता75,710
राजदरणधीर कुमार सिंह68,939
निर्दलीयसुनील कुमार6,062
निर्दलीयसंजीव कुमार सिंह3,744
निर्दलीयसुभाष रे3,193
बसपामनोज महतो2,909
नोटाइनमें से कोई भी नहीं1,920

कोसल साम्राज्य का हिस्सा रहा छपरा

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, छपरा का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। यह क्षेत्र कभी कोसल साम्राज्य का हिस्सा रहा है। 9वीं शताब्दी के महेंद्र पाल देव के शासनकाल से इसका पहला लिखित उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि यहां के दाहियावां मुहल्ले में दधीचि ऋषि का आश्रम था। इसके पास ही रिविलगंज में गौतम ऋषि का आश्रम स्थित है, जहां कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है। छपरा से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण धार्मिक कथा अंबिका भवानी मंदिर से संबंधित है। कहा जाता है कि यहीं राजा दक्ष का यज्ञकुंड था, जिसमें देवी सती ने भगवान शिव के अपमान के बाद आत्मदाह किया था।

छपरा में कब होंगे चुनाव (Chapra Election Date)

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनावी नतीजे14 नवंबर 2025

इसके अलावा रामपुर कल्लन गांव, जो छपरा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है, स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है। यहां के सरदार मंगल सिंह स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रसिद्ध थे। 16वीं शताब्दी में अकबर के शासनकाल के दौरान ‘आइन-ए-अकबरी’ में भी छपरा का उल्लेख मिलता है। ब्रिटिश काल में यह एक प्रमुख नदी बाजार के रूप में विकसित हुआ, जहां डच, फ्रांसीसी, पुर्तगालियों और अंग्रेजों ने शोरा (साल्टपीटर) के अपने शोधन केंद्र स्थापित किए।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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