Bihar Election 2025: पूर्णिया विधानसभा सीट बिहार के उत्तर-पूर्व में स्थित है और यहां हर समुदाय के लोग रहते हैं। हिंदू आबादी लगभग तीन-चौथाई है, जबकि मुस्लिम मतदाता करीब 23 प्रतिशत हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। इस सीट की खासियत यह है कि यहां शहरी मतदाताओं की संख्या ग्रामीण इलाकों से ज्यादा है, इसलिए यहां मुद्दे भी बाकी इलाकों से कुछ अलग रहते हैं।
क्या है पूर्णिया का राजनीतिक समीकरण?
पूर्णिया सीट का राजनीति से गहरा रिश्ता है। पहले यहां कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन 2000 के बाद बीजेपी ने मजबूत पकड़ बना ली। 2020 के चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार विजय कुमार खेमका ने कांग्रेस प्रत्याशी को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। तब से यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है।
2025 का मुकाबला और उम्मीदवार
आगामी चुनाव में बीजेपी ने फिर से विजय कुमार खेमका को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से बादशाह हुसैन और राजद से गुलाम सरवर के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा जन अधिकार पार्टी (पप्पू यादव की पार्टी) भी यहां मुकाबले को दिलचस्प बना रही है। माना जा रहा है कि पप्पू यादव का असर इस सीट पर इस बार बड़ा फैक्टर बन सकता है।
मुद्दे और जनता की प्राथमिकता
यहां के लोग अब सिर्फ जाति नहीं, बल्कि कामकाज के आधार पर नेता चुनना चाहते हैं। शहर में ट्रैफिक, सड़क और जलजमाव की समस्या है, जबकि ग्रामीण इलाकों में बाढ़ और रोजगार सबसे बड़े मुद्दे हैं। युवाओं में विकास और शिक्षा को लेकर नाराजगी भी साफ दिख रही है।
पूर्णिया सीट पर इस बार मुकाबला रोमांचक है। बीजेपी अपने विकास कार्यों और संगठन की ताकत पर भरोसा कर रही है, जबकि विपक्ष बदलाव के मूड में जनता को साधने की कोशिश में है। अब देखना यह है कि मतदाता परंपरा को बरकरार रखते हैं या नया फैसला सुनाते हैं।
