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Phulwari Assembly Election 2025: 1977 से अब तक...फुलवारी सीट का चुनावी सफर रहा बेहद शानदार; जानें इस विधानसभा क्षेत्र का हाल क्या है?

Phulwari Assembly Election 2025: पटना से सटी फुलवारी विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली केंद्र रही है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट न केवल पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र की सियासी दिशा तय करती है, बल्कि जातीय और वैचारिक संतुलन का भी प्रतीक मानी जाती है। 1977 से अब तक यह क्षेत्र कई राजनीतिक बदलावों और नेताओं के उतार-चढ़ाव का साक्षी रहा है।

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फुलवारी विधानसभा चुनाव 2025

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Phulwari Assembly Election 2025: पटना से सटी फुलवारी विधानसभा सीट भले ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो, लेकिन बिहार की राजनीति में इसका महत्व किसी बड़े राजनीतिक अखाड़े से कम नहीं है। यह सीट पाटलीपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहां के नतीजे अक्सर पटना की सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 1977 में अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक 12 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। फुलवारी की राजनीतिक कहानी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। शुरुआती वर्षों में कांग्रेस ने यहां तीन बार जीत हासिल की, जबकि इसके बाद राजद ने मजबूती दिखाते हुए चार बार विजय दर्ज की।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने भी फुलवारी विधानसभा सीट पर दो बार जीत दर्ज की है। इस सीट का इतिहास श्याम रजक के उल्लेख के बिना अधूरा माना जाता है। रजक कुल छह बार यहां से विधायक रह चुके हैं, जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने जनता दल के टिकट पर एक बार, राजद के टिकट पर तीन बार और जदयू के टिकट पर दो बार जीत हासिल की। राजनीतिक दलों के बीच कई बार पाला बदलने के बावजूद, उनका प्रभाव इस क्षेत्र में हमेशा मजबूत बना रहा। वर्तमान में वह दोबारा राजद में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनाव ने इस सीट की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी — उस चुनाव में फुलवारी सीट महागठबंधन की सहयोगी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [सीपीआई(एमएल)] के खाते में चली गई। इस सीट पर फेज 1 में 6 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी।

फुलवारी का जातीय समीकरण

सीपीआई (माले-लिबरेशन) के प्रत्याशी गोपाल रविदास ने 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के वरिष्ठ नेता अरुण मांझी को बड़े अंतर से पराजित किया था। गोपाल रविदास को 91,124 वोट मिले, जबकि अरुण मांझी को 77,267 वोटों पर रुकना पड़ा। चूंकि यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसलिए दलित मतदाता यहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2020 के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, फुलवारी क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23.45 प्रतिशत थी, जिनमें पासवान और रविदास समुदाय का विशेष प्रभाव देखा जाता है। इसके अलावा, मुस्लिम मतदाता (14.9 प्रतिशत) और अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे यादव तथा कुशवाहा-कोयरी समुदाय भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण इलाकों में वाम दलों, विशेषकर सीपीआई (माले) का कैडर वोट काफी संगठित माना जाता है, जबकि यादव और मुस्लिम मतदाताओं का पारंपरिक समर्थन आम तौर पर राजद के पक्ष में जाता है। यही सामाजिक और राजनीतिक समीकरण फुलवारी की हर चुनावी लड़ाई को बेहद रोमांचक बना देता है।

फुलवारी की भौगोलिक और सामाजिक संरचना

एक ओर छह बार के विधायक रह चुके श्याम रजक हैं, जिन्होंने दोबारा राजद में वापसी कर ली है और फुलवारी सीट पर अपना दावा मजबूत बना रखा है। वहीं, दूसरी तरफ सीपीआई (माले) के गोपाल रविदास हैं, जिन्होंने 2020 के चुनाव में जीत दर्ज कर इस क्षेत्र में पार्टी का परचम लहराया था। फुलवारी विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक संरचना इसे विशिष्ट बनाती है। यह मुख्य रूप से दो प्रमुख हिस्सों फुलवारी और पुनपुन में विभाजित है। पटना शहर के निकट होने के बावजूद, यहां का इलाका ग्रामीण और अर्ध-शहरी जीवन का संतुलित संगम प्रस्तुत करता है। पुनपुन क्षेत्र पवित्र पुनपुन नदी के कारण प्रसिद्ध है, जो हिंदू धर्म में ‘श्राद्ध’ और पितृपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल मानी जाती है। दूसरी ओर, फुलवारी शरीफ अपनी प्राचीन इस्लामी शिक्षा और सूफी परंपरा के लिए विख्यात है। इन दोनों क्षेत्रों के बीच सदियों से एक विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान कायम रही है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र अत्यंत समृद्ध रहा है। कभी यह प्राचीन मगध साम्राज्य का हिस्सा था, जो बाद में मौर्य और गुप्त राजवंशों के अधीन रहा तथा आगे चलकर दिल्ली सल्तनत और मुस्लिम शासकों के प्रभाव में आया।

(इनपुट - आईएएनएस)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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