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Manihari Assembly Elections 2025: क्या है मनिहारी सीट का समीकरण, जानें बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ा अपडेट

Manihari Assembly Constituency (मनिहारी विधानसभा सीट): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तैयारियां जोर से चल रही हैं। अभी तक चुनाव की तारीखों का एलान नहीं किया गया है। हालांकि, मतदान संपन्न कराने के लिए 470 वरिष्ठ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने की तैयारी कर ली गई है। तो चलिए हम भी विधानसभा वार सीटों से जुड़े कुछ पहलुओं पर बात करते हैं। सबसे पहले कटिहार जिले की मनिहारी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पर नजर डालते हैं।

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मनिहारी विधानसभा चुनाव 2025

Manihari Assembly Constituency (मनिहारी विधानसभा सीट): मनिहारी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-67 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है। हालांकि, पहले यह सीट सामान्य सीट हुआ करती थी। 2008 की परिसीमन अधिसूचना के अनुसार यह मनिहारी, मनसाही और अमदाबाद प्रखंडों को सम्मिलित करता है। मनिहारी की भौगोलिक परिस्थिति पर नजर डालें तो यह गंगा के किनारे बसा है। यहां गंगा नदी एवं फेरी सेवा इसे झारखंड के साहेबगंज से जोड़ती है। यह इलाका गंगा और महानंदा नदियों की उपजाऊ एवं समतल भू-भाग है, लेकिन प्रत्येक साल बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं से प्रभावित होता रहा है।

कब बनी मनिहारी विधानसभा सीट

मनिहारी विधानसभा क्षेत्र की स्थापना साल 1951 में हुई थी। अब तक यहां 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 7 बार कांग्रेस पार्टी ने विजय पताका फहराया है, जबकि अन्य दलों ने 10 बार जीत दर्ज की है। समाजवादी नेता युवराज ने लगातार 4 बार (तीन बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और एक बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से) जीत हासिल की।

मनिहारी चुनाव के रिजल्ट

2008 में परिसीमन के बाद सिर्फ एक नेता मनोहर प्रसाद सिंह (Manohar Prasad Singh) ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। साल 2010 में वे जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर 41,65 वोटों से जीतकर विधायक बने। जब जदयू के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होकर यह सीट कांग्रेस को दे दी, तब मनोहर प्रसाद सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और 2015 का चुनाव 13,680 वोटों से जीता। इसके बाद 2020 में उन्होंने 21,209 वोटों के बड़े अंतराल से लगभग 46 फीसदी वोट (83,032 वोट) लेकर जदयू उम्मीदवार शंभू कुमार सुमन को हराकर सीट अपने पास रखी।

2020 विधानसभा चुनाव का परिणाम
प्रत्याशी का नाममत प्राप्त
मनोहर प्रसाद सिंह (कांग्रेस)83,032
शंभू कुमार सुमन (जदयू)61,823
अनिल कुमार उरांव (एलजेपी)20,441
नोटा 3,456

क्या है मनिहारी विधानसभा क्षेत्र जातीय समीकरण

साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, मनिहारी में 2,87266 रजिस्टर्ड वोटर थे। इनमें से 37,258 (12.97%) अनुसूचित जनजाति, 20,970 (7.30%) अनुसूचित जाति और 1,11,746 (38.90%) मुस्लिम मतदाता थे। इस विधानसभा का अधिकांश भाग ग्रामीण है, जहां शहरी मतदाताओं की संख्या महज 6.01 % है। यहां संथाल और उरांव समुदाय का बाहुल्य है।

मनिहारी विधानसभा सीट से विधायकों की लिस्ट
साल विधायक का नामपार्टी
2020 मनोहर प्रसाद सिंहकांग्रेस
2015 मनोहर प्रसाद सिंह कांग्रेस
2010 मनोहर प्रसाद सिंहजेडीयू
अक्टूबर 2005 मुबारक हुसैन कांग्रेस
फरवरी 2005 मुबारक हुसैन कांग्रेस
2000 विश्वनाथ सिंहजेडीयू
1995 मुबारक हुसैनकांग्रेस
1990 विश्वनाथ सिंहजनता दल
1985 मोहम्मद मोबारक हुसैनकांग्रेस
1980राम सिपाही यादव जेएनपी-जेपी
1977राम सिपाही यादवजेएनपी

मनिहारी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या

जानकारी के मुताबिक, 2015 में मनिहारी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 2,47,621 थी। इनमें से 1,31,997 पुरुष और 1,15,614 महिला वोटर थी। हालांकि, अभी नए आंकड़ों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी जानकारी हम आपके साथ साझा करेंगे।

FAQs

बिहार में विधानसभा चुनाव कब हैं?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का एलान नहीं किया गया है। हालांकि, मतदान संपन्न कराने के लिए 470 वरिष्ठ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने की तैयारी कर ली गई है। इलेक्शन कमीशन 4 से 5 अक्टूबर तक चुनाव को लेकर घोषण कर सकता है।

मनिहारी विधानसभा चुनाव का समीकरण क्या है?

मनिहारी सीट पर चुनाव कब होंगे?

मनिहारी सीट का विधायक कौन है?

मनिहारी विधानसभा में कितने वोटर हैं?

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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