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Kumhrar Assembly Seat 2025: BJP के अभेद्य किले कुम्हरार में इस बार क्या है चुनावी माहौल; जानें क्या है सीट का समीकरण

Kumhrar Assembly Constituency (कुम्हरार विधानसभा सीट): कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र आज पटना की राजनीति में अहम नाम है। यह भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, जहां सुशील मोदी और अरुण कुमार सिन्हा ने लगातार जीत दर्ज की। 2025 में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। आइए जानते हैं क्या है कुम्हरार सीट का चुनावी समीकरण।

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क्या है कुम्हरार सीट का चुनावी हाल

Photo : Times Now Digital

Kumhrar Assembly Constituency (कुम्हरार विधानसभा सीट): पटना का कुम्हरार क्षेत्र वह भूभाग है, जहां कभी पाटलिपुत्र जैसी राजधानी खड़ी थी। राजगीर से राजधानी स्थानांतरण के बाद अजातशत्रु ने यहां जिस शहर की नींव रखी, वह आगे चलकर मौर्यों की शक्ति का केंद्र बना। चाणक्य के मार्गदर्शन में चंद्रगुप्त मौर्य ने यहीं से साम्राज्य खड़ा किया और सम्राट अशोक के समय यहां से शासन की सीमाएं अफगानिस्तान से बंगाल तक फैल गईं।

पटना सेंट्रल से कुम्हरार का सफर

1977 में ‘पटना सेंट्रल’ के नाम से यह सीट अस्तित्व में आई थी। परिसीमन के बाद 2008 में इसका नाम बदल कर ‘कुम्हरार’ कर दिया गया। 2010 में नए नाम से पहला चुनाव हुआ और आज यह पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा खंडों में से एक है। कुम्हरार पूरी तरह शहरी क्षेत्र में आता है, जिसमें पटना नगर निगम के आठ वार्ड और पटना ग्रामीण के एक हिस्से को शामिल किया गया है।

भाजपा का अभेद्य गढ़

यह सीट बीजेपी के लिए सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि एक लगातार ‘सेफ जोन’ रही है। भाजपा ने यहां पहली जीत 1980 में दर्ज की थी और सिर्फ 1985 में कांग्रेस के हाथों हार मिली थी। इसके बाद लगातार तीन बार सुशील कुमार मोदी ने यहां से जीत दर्ज कर आधार मजबूत किया। उनके बाद अरुण कुमार सिन्हा की पांच बार की लकीर खिंचती गई और यही सिलसिला कुम्हरार नाम के साथ जारी रहा।

पिछले चुनावों में कैसा रहा हाल

2020 के विधानसभा चुनाव में अरुण कुमार सिन्हा ने राजद के धर्मेंद्र कुमार को लगभग 26,500 मतों से हराया। 2010 में जहां अंतर 67 हजार से अधिक था, वहीं 2015 में यह अंतर 37 हजार के आसपास था। यहां भाजपा के वर्चस्व का ट्रेंड स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 2014 में भाजपा ने 64,033 वोटों की बढ़त हासिल की, जो 2019 में थोड़ी घटकर 62,959 रह गई। 2024 में यह बढ़त और कम होकर 47,149 पर पहुंच गई। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि हालांकि भाजपा अब भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन समय के साथ उसकी बढ़त में गिरावट आई है, जो बदलते राजनीतिक समीकरणों और मतदाता रुझानों की ओर संकेत करता है।

कुम्हरार का सामाजिक समीकरण

2020 के आंकड़ों के अनुसार, इस जिले में कुल वोटर 4.27 लाख से अधिक थे जो 2024 के आम चुनाव तक बढ़कर 4.30 लाख से ज्यादा हो गए। अनुसूचित जाति के वोटर यहां करीब 7.2 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता करीब 11.6 प्रतिशत हैं। कायस्थ वोट यहां लगातार भाजपा के लिए बैकबोन रहे हैं। भूमिहार व ओबीसी समूह भी भाजपा को सपोर्ट बेस प्रदान करते हैं। यादव, कोयरी, कुर्मी, राजपूत, ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाता भी संख्या में मौजूद हैं, लेकिन विपक्ष इन समूहों को एकजुट वोट में तब्दील नहीं कर पाया है।

कुम्हरार में कब होंगे चुनाव (Kumhrar Election Date)

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनाव नतीजे14 नवंबर 2025

नया चुनाव, नए चेहरे

कुम्हरार विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जहां भाजपा के संजय गुप्ता, कांग्रेस के डॉ. इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी और जनसुराज के डॉ. केसी सिन्हा प्रमुख दावेदार हैं। यह सीट पहले भाजपा के अरुण कुमार सिन्हा के पास थी, लेकिन इस बार पार्टी ने नया चेहरा संजय गुप्ता को मैदान में उतारा है, जिन्हें अरुण सिन्हा का समर्थन भी प्राप्त है, जिससे कायस्थ वोट भाजपा के पक्ष में एकजुट होने की संभावना है। कांग्रेस ने पूर्व भाजपा नेता और वर्तमान वार्ड पार्षद डॉ. इंद्रदीप चंद्रवंशी को उम्मीदवार बनाया है, जो अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। वहीं, जनसुराज के डॉ. केसी सिन्हा एक प्रसिद्ध गणितज्ञ हैं, जिन्होंने 70 से अधिक किताबें लिखी हैं और छात्रों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। कायस्थ समुदाय से आने वाले डॉ. सिन्हा को इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जा रही है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारी author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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