Patna Sahib Assembly Constituency (पटना साहिब विधानसभा सीट): पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र सिर्फ चुनावी मानचित्र पर एक सीट नहीं है, यह बिहार की राजनीति में भाजपा के लंबे वर्चस्व का प्रतीक माना जाता है। इस सीट का उल्लेख हो और भाजपा के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव का नाम न आए, ऐसा संभव ही नहीं है। सात बार लगातार विधानसभा पहुंचकर उन्होंने इस सीट को पार्टी के लिए एक ऐसा किला बनाया, जिसे विपक्ष अब तक भेद नहीं पाया है।
भाजपा का स्थायी प्रभाव
पटना साहिब क्षेत्र में ग्रामीण आबादी नहीं है। पूरा क्षेत्र शहर की राजनीति, शहरी ढांचे, विकास और भाजपा की परंपरागत साख पर केंद्रित रहता है। जनसंघ काल से ही यहां भाजपा का झुकाव मजबूत रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी यह रुझान बरकरार रहा, जहां नंद किशोर यादव ने कांग्रेस के प्रवीन सिंह को व्यापक अंतर से मात दी।
नंद किशोर यादव की राजनीतिक यात्रा
जेपी आंदोलन से छात्र नेता के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले नंद किशोर यादव ने आपातकाल के समय जेल भी काटी। 1957 से 2008 तक यह सीट ‘पटना ईस्ट’ नाम से जानी जाती थी और इसी अवधि में उन्होंने यहां लगातार चार बार जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद 2010 में जब सीट का नाम पटना साहिब हुआ, तब भी एंटी-इन्कम्बेंसी के सभी अनुमानों को धता बताते हुए उन्होंने तीन बार और जीत हासिल की। उनकी बढ़ती जीत का अंतर इस गढ़ की अभेद्यता को और पुख्ता करता गया।
नए चुनाव में नए चेहरे
इस बार चुनावी तस्वीर में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। 72 वर्ष पूरे कर चुके नंद किशोर यादव को इस बार टिकट नहीं मिला है। भाजपा ने उनकी जगह रत्नेश कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने उच्च शिक्षित शशांत शेखर पर दांव लगाया है, जो IIT-Delhi और IIM-Calcutta से शिक्षित हैं।
जातीय समीकरण भी इस मुकाबले में अहम रहेंगे। वैश्य समुदाय के करीब 80 हजार मतदाता इस क्षेत्र की दिशा तय करने की क्षमता रखते हैं। कोइरी, कुर्मी, यादव और मुस्लिम वोट भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
पटना साहिब में कब होंगे चुनाव (Patna Sahib Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
धर्म और राजनीति की दोहरी पहचान
यह इलाका सिर्फ राजनीतिक नहीं, धार्मिक आस्था से भी गहराई से जुड़ा है। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि यहां स्थित है। तख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा दुनिया भर के सिखों के लिए सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है। इस आध्यात्मिक के कारण पटना साहिब की पहचान शांति, विश्वास और सांस्कृतिक सम्मान से भी जुड़ी मानी जाती है।
