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Patna Sahib Assembly Seat 2025: भाजपा के गढ़ पटना साहिब में विरोधी दलों के लिए कितना भारी होगा यह चुनाव; जानें क्या है समीकरण

Patna Sahib Assembly Constituency (पटना साहिब विधानसभा सीट): पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र भाजपा के लंबे वर्चस्व का प्रतीक रहा है, जहां नंद किशोर यादव ने सात बार जीत दर्ज कर इसे अभेद्य किला बना दिया। शहरी मुद्दों पर केंद्रित यह सीट 2008 के परिसीमन से पहले पटना ईस्ट के नाम से जानी जाती थी। आइए समझते हैं पटना साहिब सीट का चुनावी हाल।

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क्या है पटना साहिब सीट का चुनावी समीकरण

Photo : Times Now Digital

Patna Sahib Assembly Constituency (पटना साहिब विधानसभा सीट): पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र सिर्फ चुनावी मानचित्र पर एक सीट नहीं है, यह बिहार की राजनीति में भाजपा के लंबे वर्चस्व का प्रतीक माना जाता है। इस सीट का उल्लेख हो और भाजपा के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव का नाम न आए, ऐसा संभव ही नहीं है। सात बार लगातार विधानसभा पहुंचकर उन्होंने इस सीट को पार्टी के लिए एक ऐसा किला बनाया, जिसे विपक्ष अब तक भेद नहीं पाया है।

भाजपा का स्थायी प्रभाव

पटना साहिब क्षेत्र में ग्रामीण आबादी नहीं है। पूरा क्षेत्र शहर की राजनीति, शहरी ढांचे, विकास और भाजपा की परंपरागत साख पर केंद्रित रहता है। जनसंघ काल से ही यहां भाजपा का झुकाव मजबूत रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी यह रुझान बरकरार रहा, जहां नंद किशोर यादव ने कांग्रेस के प्रवीन सिंह को व्यापक अंतर से मात दी।

नंद किशोर यादव की राजनीतिक यात्रा

जेपी आंदोलन से छात्र नेता के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले नंद किशोर यादव ने आपातकाल के समय जेल भी काटी। 1957 से 2008 तक यह सीट ‘पटना ईस्ट’ नाम से जानी जाती थी और इसी अवधि में उन्होंने यहां लगातार चार बार जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद 2010 में जब सीट का नाम पटना साहिब हुआ, तब भी एंटी-इन्कम्बेंसी के सभी अनुमानों को धता बताते हुए उन्होंने तीन बार और जीत हासिल की। उनकी बढ़ती जीत का अंतर इस गढ़ की अभेद्यता को और पुख्ता करता गया।

नए चुनाव में नए चेहरे

इस बार चुनावी तस्वीर में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। 72 वर्ष पूरे कर चुके नंद किशोर यादव को इस बार टिकट नहीं मिला है। भाजपा ने उनकी जगह रत्नेश कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने उच्च शिक्षित शशांत शेखर पर दांव लगाया है, जो IIT-Delhi और IIM-Calcutta से शिक्षित हैं।

जातीय समीकरण भी इस मुकाबले में अहम रहेंगे। वैश्य समुदाय के करीब 80 हजार मतदाता इस क्षेत्र की दिशा तय करने की क्षमता रखते हैं। कोइरी, कुर्मी, यादव और मुस्लिम वोट भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

पटना साहिब में कब होंगे चुनाव (Patna Sahib Election Date)

नोटिफिकेशन की तारीख10 अक्टूबर 2025
नामांकन की आखिरी तारीख17 अक्टूबर 2025
नामांकन जांच की आखिरी तारीख18 अक्टूबर 2025
नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख20 अक्टूबर 2025
मतदान6 नवंबर 2025
चुनाव नतीजे14 नवंबर 2025

धर्म और राजनीति की दोहरी पहचान

यह इलाका सिर्फ राजनीतिक नहीं, धार्मिक आस्था से भी गहराई से जुड़ा है। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि यहां स्थित है। तख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा दुनिया भर के सिखों के लिए सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है। इस आध्यात्मिक के कारण पटना साहिब की पहचान शांति, विश्वास और सांस्कृतिक सम्मान से भी जुड़ी मानी जाती है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारी author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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