Jhajha Assembly Constituency Election 2025: बिहार के जमुई जिले में स्थित झाझा एक प्रमुख प्रखंड है, जो झारखंड की सीमा के बेहद करीब स्थित है। बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से एक झाझा सीट भी शामिल है, जहां वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। इस सीट पर भाजपा, जेडीयू और एलजेपी का मुकाबला आरजेडी और कांग्रेस के गठबंधन से कड़ा होने की संभावना है। ऐतिहासिक संदर्भ में झाझा की जानकारी सीमित है, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान यह हावड़ा-मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) रेलवे मार्ग का एक अहम स्टेशन था। उस दौर में यहां एक बड़ा लोको शेड हुआ करता था, जहां भाप इंजनों की देखरेख की जाती थी। मगर रेलवे के विद्युतीकरण के साथ झाझा का यह महत्व धीरे-धीरे कम होता गया। वर्तमान में झाझा अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध जैव विविधता और घने हरियाली के लिए जाना जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है, क्योंकि यह कई पक्षी अभयारण्यों के निकट बसा है। इसके आसपास फैली झारखंड की पहाड़ियां इसके प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक आकर्षक बनाती हैं। जैसे झाझा अपनी प्रकृति के लिए पहचाना जाता है, वैसे ही इसकी राजनीतिक यात्रा भी काफी विविध रही है। 1951 में विधानसभा क्षेत्र के रूप में स्थापित होने के बाद से इसने लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को प्रतिनिधित्व का अवसर दिया है।
18 बार चुनाव का मैदान बना है झाझा
अब तक झाझा विधानसभा क्षेत्र में कुल 18 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें एक उपचुनाव भी शामिल है। इस दौरान यहां से आठ विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके हैं। कांग्रेस को सबसे अधिक सात बार सफलता मिली है, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) और उसकी पूर्ववर्ती समता पार्टी ने संयुक्त रूप से पांच बार जीत हासिल की है। समाजवादी पार्टी और संयुक्त समाजवादी पार्टी ने तीन बार, वहीं भाजपा, जनता दल और जनता पार्टी ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया है।
2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजे
2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पहली बार इस सीट पर जीत की दहलीज पर पहुंचा था, लेकिन मामूली अंतर से उसे हार का सामना करना पड़ा। राजद के उम्मीदवार राजेन्द्र प्रसाद जदयू के प्रत्याशी दामोदर रावत से सिर्फ 1,679 मतों से पराजित हो गए। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार अरुण भारत, जो जमुई से सांसद बने, ने झाझा विधानसभा क्षेत्र में 7,615 वोटों की बढ़त हासिल कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
झाझा विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
झाझा विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है, यानी यह एक सामान्य सीट है। यहां की जनसंख्या संरचना सामाजिक रूप से विविध है। अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 15.85% है, अनुसूचित जनजातियां करीब 4.42% हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या लगभग 11.2% है। मतदाता दृष्टिकोण से देखा जाए तो ग्रामीण क्षेत्र का वर्चस्व साफ नजर आता है। कुल मतदाताओं में से 88.89% ग्रामीण इलाकों से आते हैं, जबकि शहरी मतदाताओं की हिस्सेदारी मात्र 11.11% है। 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां कुल 3,16,049 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 61.58% ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 2024 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,41,013 तक पहुंच गई है।
कैसा होगा साल 2025 का चुनाव?
पिछले दो विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो झाझा सीट पर एक बार जदयू और एक बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। 2024 के लोकसभा चुनावों के रुझान यह संकेत जरूर देते हैं कि राजद के लिए यहां जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। उसे सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि एक सशक्त रणनीति और व्यापक जनसमर्थन की भी जरूरत पड़ेगी। वहीं, अन्य दलों के लिए यह एक अवसर हो सकता है कि वे जदयू से यह सीट छीनकर अपनी स्थिति मजबूत करें। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास बन गया है क्योंकि जनसुराज जैसी नई राजनीतिक पार्टी भी मैदान में किस्मत आजमा रही है। अब देखना होगा कि मतदाता इस नई पार्टी को कितना समर्थन देते हैं और किस राजनीतिक दल को अपना विश्वास सौंपते हैं।
