Hilsa Assembly Constituency (हिलसा विधानसभा सीट): नालंदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला हिलसा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुर्खियों में है। यह सीट ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में आने के कारण इस क्षेत्र पर JDU का परंपरागत प्रभाव रहा है, लेकिन RJD भी यहां कड़ी टक्कर देती आई है।
हिलसा का राजनीतिक इतिहास
अब तक हिलसा में 16 बार चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस ने यहां 4 बार, समता पार्टी (जो बाद में जेडीयू में विलीन हुई) ने 5 बार, जबकि जनसंघ, बीजेपी, RJD, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार जीत दर्ज की है। यह सीट जातीय समीकरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यहां कुर्मी और यादव मतदाता यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पासवान, रविदास, भूमिहार, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
2020 में हुआ सबसे करीबी मुकाबला
2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के कृष्ण मुरारी शरण (उर्फ प्रेम मुखिया) ने राजद के अत्रिमुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को मात्र 12 वोटों के अंतर से हराया था, जो बिहार चुनाव इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक है। इससे पहले 2015 में राजद के शक्ति सिंह यादव ने लोजपा की दीपिका कुमारी को 2,600 से अधिक वोटों से मात दी थी। यानी यह सीट पिछले एक दशक से जेडीयू और राजद के बीच सीधी टक्कर का मैदान बनी हुई है।
2025 में कौन-कौन हैं मैदान में
इस बार हिलसा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। JDU से कृष्ण मुरारी शरण फिर से मैदान में हैं। RJD ने अत्रिमुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को दोबारा टिकट दिया है। वहीं जन सुराज पार्टी से उमेश कुमार वर्मा मैदान में उतार कर समीकरण त्रिकोणीय बन सकता है।
हिलसा में मतदाताओं का गणित
चुनाव आयोग की 30 सितंबर 2025 की मतदाता सूची के अनुसार, हिलसा विधानसभा में 3 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें करीब 1.59 लाख पुरुष और 1.43 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। यह नालंदा जिले की सबसे बड़ी मतदाता संख्या वाली सीटों में से एक है। औसत मतदान प्रतिशत 51-55% के बीच रहता है। यादव और कुर्मी मतदाता यहां निर्णायक हैं। यादव वोट बैंक पर RJD की पकड़ है, जबकि कुर्मी मतदाता पारंपरिक रूप से JDU के समर्थन में माने जाते हैं।
भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान
हिलसा में हिलसा, करायपरसुराय, थरथरी और परवलपुर प्रखंड शामिल हैं। यह क्षेत्र सोन और फल्गु नदियों के बीच स्थित है। प्राचीन काल में इसे ‘हलधरपुर’ कहा जाता था। आसपास का तेलहाड़ा क्षेत्र प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है, जो नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों की तरह विद्या केंद्र रहा होगा। औंगारी धाम और सूर्य मंदिर जैसे धार्मिक स्थल यहां की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।
हिलसा में कब होंगे चुनाव (Hilsa Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
इस बार फिर कांटे की टक्कर तय
2025 के विधानसभा चुनाव में हिलसा एक बार फिर बिहार की सबसे रोमांचक सीटों में शामिल हो सकती है। एक ओर JDU अपने कुर्मी वोट बैंक और NDA गठबंधन की लोकसभा बढ़त को भुनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर RJD अपने यादव-मुस्लिम समीकरण के सहारे 2020 की हार का बदला लेने में जुटी है। हिलसा का इतिहास बताता है कि यहां जीत और हार के बीच की दूरी कभी ज्यादा नहीं रही और यही इस चुनाव को सबसे दिलचस्प बना देता है।
