Baramulla Record Polling: अनुच्छेद 370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले पर जम्मू-कश्मीर की जनता ने अपनी मुहर लगा दी है। श्रीनगर के बाद अब बारामूला के लोगों ने पांचवें चरण में बंपर वोटिंग करते हुए रिकॉर्ड बना दिया। खास बात यह है कि बारामूला में वोटिंग राजनीतिक रूप से अहम एवं बड़े राज्यों बिहार, महाराष्ट्र से ज्यादा मतदान हुआ है। यह लोकतंत्र एवं सरकारी नीतियों के प्रति उनके समर्थन एवं आस्था को दर्शाता है। सोमवार को बारामूला में 56.73 प्रतिशत मतदान हुआ जो कि 1984 के बाद सबसे ज्यादा है। 1984 में बारामूला सीट पर 61.09 प्रतिशत मतदान हुआ था।
बिहार, महाराष्ट्र से ज्यादा मतदान
जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पीके पोल ने बताया कि संसदीय क्षेत्र सोपोर विधानसभा क्षेत्र में 44.36 फीसदी मतदान हुआ जो कि यहां कुछ दशकों तक मतदान 10 प्रतिशत से कम रहता था। चुनाव आयोग ने रात 11.30 बजे मतदान प्रतिशत के आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार बिहार में 54.85, जम्मू कश्मीर में 56.73, झारखंड में 63.07, लद्दाख में 69.62, महाराष्ट्र में 54.29, ओडिशा में 67.59, उत्तर प्रदेश में 57.79 और पश्चिम बंगाल में 74.65 फीसद मतदान हुआ।

बारामूला में रिकॉर्ड मतदान।
बारामूला के लोगों में दिखा जबर्दस्त उत्साह
खास बात यह है कि बंपर वोटिंग को अलगाववादी पार्टियों के एजेंडे को नकारने के रूप में देखा जा रहा है। लोकतंत्र में लोगों की बढ़ती आस्था ने फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को एक बड़ा झटका दिया है। ये नेता दावा कर रहे थे कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद लोगों में गुस्सा है और वे इसे दोबारा पाना चाहेंगे। उनकी आशंका था कि मतदान के लिए लोग इतनी बड़ी संख्या में नहीं निकलेंगे लेकिन मतदान के दिन लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। बारामूला के कई मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में महिलाएं नजर आईं।
फारूक-महबूबा के सुर बदल गए
मतदान के इस रिकॉर्ड आंकड़े पर फारूक और महबूबा दोनों के सुर बदल गए हैं। अब वे कह रहे हैं कि लोग वोट देकर अपने पसंदीदा प्रतिनिधि को संसद भेजना चाहते हैं ताकि वे उनके मुद्दों जिनमें अनुच्छेद 370 की वापसी भी शामिल है, जोर-शोर से उठाएं।
बारामूला में 5.5% तक पहुंच गया था मतदान
लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में श्रीनगर सीट पर वोटिंग हुई। गत 13 मई को इस सीट पर हुए चुनाव में 38.49 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो 1996 के बाद से सबसे अधिक है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर खासकर घाटी में यह पहला आम चुनाव है। बारामूला क्षेत्र 1989 से आतंकवाद की चपेट में था। इसकी वजह से मतदान 5.5% के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।
