इलेक्शन

हरियाणा चुनाव से पहले साथ आए चंद्रशेखर और दुष्यंत चौटाला, सभी 90 सीटों पर लड़ेगा गठबंधन

Haryana Assembly Elections: हरियाणा विधानसभा चुनाव के चुनाव नतीजों में दलित और जाट वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ऐसे में दुष्यंत चौटाला और चंद्रशेखर आजाद का गठबंधन भाजपा और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

Image

हरियाणा विधानसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद और दुष्यंत चौटाला के बीच हुआ गठबंधन।

Photo : BCCL

Haryana Assembly Elections: हरियाणा विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद राज्य में चुनावी बिसात बिछना शुरू हो गई है। राजनीतिक दल एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए दांव-पेंच में जुट गए हैं। इस बीच दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी और चंद्रशेखर आजादी की आजाद समाज पार्टी ने गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया है। दोनों पार्टियां गठबंधन के तले हरियाणा की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। जानकारी के मुताबिक, चौटाल की जेजेपी 70 सीटों पर और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इस दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कहा, हमारे मुद्दे साफ हैं। युवाओं को रोजगार, गरीबों को महंगाई से राहत, सामाजिक न्याय और निजीकरण खत्म करना। उन्होंने कहा, हरियाणा में हमारा गठबंधन पदोन्नति में आरक्षण, एमएसपी, बेहतर कानून व्यवस्था के लिए भी चुनाव लड़ेगा। हमें उम्मीद है कि हमारा गठबंधन सभी 90 सीटें जीतेगा।

जेजेपी ने 2019 में जीती थीं 10 सीटें

बता दें, इसस पहले दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने 2019 में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा था और 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। चुनाव के बाद जेजेपी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके हरियाणा में सरकार बनाई थी, जिसमें दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जेजेपी ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं और पार्टी के कई विधायक बागी हो गए। वहीं, चंद्रशेखर आजाद की बात करें तो उनकी आजाद समाज पार्टी पहली बार हरियाणा में चुनाव लड़ेगी।

कैसे हैं हरियाणा के समीकरण

हरियाणा के सियासी समीकरणों की बात करें तो यहां पर दलित और जाट वोटर्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। हरियाणा में 25 फीसदी जाट मतदाता हैं तो दलित मतदाता की संख्या 20 फीसदी है। ऐसे में दुष्यंत चौटाला और चंद्रशेखर आजाद के साथ आने से अन्य पार्टियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article