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Mathura News : जन्माष्टमी से पहले खुली व्यवस्थाओं की पोल, आधे घंटे की बारिश में जलमग्न हुई मथुरा की सड़कें

Mathura News Today : मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से ठीक पहले हुई महज 30 मिनट की तेज बारिश ने मथुरा नगर निगम के जल निकासी और साफ-सफाई के दावों को उजागर कर दिया।

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मथुरा में जलभराव

Mathura News Today : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व से ठीक पहले कान्हा की नगरी मथुरा में नगर निगम के दावों की हवा निकल गई। महज आधे घंटे की तेज बारिश ने शहर के प्रमुख मार्गों को तालाब में तब्दील कर दिया, जिससे स्थानीय नागरिकों और बाहर से आए श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जल निकासी व्यवस्था ठप

तेज बारिश से गर्मी और उमस से भले ही राहत मिली हो, लेकिन बीएसए कॉलेज रोड, नया बस स्टैंड और भूतेश्वर पुल के नीचे की सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। बीएसए कॉलेज रोड पर जलभराव इतना अधिक था कि गाड़ियां पानी के बीच हिचकोले खाती नजर आईं और पैदल यात्रियों के लिए निकलना दूभर हो गया।

स्थायी समाधान नदारद

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीएसए कॉलेज रोड पर जलभराव की समस्या बेहद पुरानी है। हल्की सी बारिश में भी यह इलाका जलमग्न हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई ठोस या स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

जन्माष्टमी से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

जन्माष्टमी पर देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के मथुरा पहुंचने की संभावना है। ऐसे में आधे घंटे की बारिश से बिगड़े हालात ने प्रशासनिक तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि त्योहार के दौरान बारिश होती है, तो जलभराव, कीचड़ और यातायात जाम से श्रद्धालुओं की परेशानी कई गुना बढ़ सकती है। नगर निगम के लिए अब कागजी दावों से इतर जमीन पर जल निकासी की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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