श्रीधन्या केरल के सबसे पिछड़े जिले वायनाड से ताल्लुक रखती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि मेरे आसपास के जिले से अब तक किसी ने यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई नहीं किया था, यहां तक कि लोग अब तक यूपीएससी या आईएएस के बारे में जानते भी नहीं थे, लेकिन मुझे भरोसा है कि मेरी उपलब्धि से प्रेरित होकर यहां के युवा अब सिविल सर्विसेज की तैयारी करेंगे। उन्होंने वायनाड के एक छोटे से स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद कोझिकोट के सेंट जोसेफ कॉलेज (कालीकट) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद श्रीधन्या ने जूलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की।
IAS Success Story: छात्रावास में किया वार्डन का काम
इसके बाद परिवार का पालन पोषण करने के लिए उन्होंने राज्य सरकार के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क की नौकरी की। श्रीधन्या का परिवार उन दिनों आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था, गरीबी का आलम इस कदर था कि किसी दिन शाम तक परिवार के लिए भरपेट खाने का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाता था। यही कारण था कि उन्होंने आदिवासी छात्रों के छात्रावास में वार्डन के रूप में भी काम किया। लेकिन इस बीच उन्होंने आईएएस श्रीराम सांबा राव को देखा, लोगों को एक कतार में उनका इंतजार करते देख उनका सपना जुनून में बदल गया और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
