देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG की नई तारीख का ऐलान हो चुका है। अब छात्र 21 जून को एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाएंगे। 3 मई को हुई परीक्षा को 13 मई को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। भारत में हर साल दर्जनों बड़ी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें लाखों छात्र शामिल होते हैं। लेकिन लगभग हर साल किसी न किसी राज्य से पेपर लीक की खबर सामने आ ही जाती है। कभी भर्ती परीक्षा, कभी बोर्ड एग्जाम और कभी एंट्रेंस टेस्ट। इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में परीक्षा प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आज हालात ऐसे हो गए हैं कि भारत में पेपर लीक कोई छोटी-मोटी घटना नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। इसका असर सिर्फ छात्रों की मेहनत पर नहीं पड़ता है, बल्कि उनके माता-पिता के सपनों और भरोसे पर भी पड़ता है। लाखों छात्र सालों मेहनत करते हैं, लेकिन एक पेपर लीक उनकी पूरी तैयारी पर पानी फेर देता है।
ऐसे में छात्रों के मन में एक सवाल बार-बार उठता है कि क्या दूसरे देशों में भी ऐसा होता है? क्या वहां भी परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र वायरल हो जाते हैं? या फिर उन्होंने ऐसा कोई सिस्टम बना लिया है जिससे पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन हो गया है? आज हम यही समझेंगे कि अमेरिका में मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा किस तरह आयोजित की जाती हैं और वहां की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है।
अमेरिका का सबसे बड़ा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम
अमेरिका में मेडिकल कॉलेज में दाखिला MCAT यानी Medical College Admission Test के जरिए होता है। जैसे भारत में NEET UG आयोजित किया जाता है, वैसे ही अमेरिका में यह परीक्षा एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन मेडिकल कॉलेजेस करवाता है। अब सबसे बड़ा सवाल क्या अमेरिका में भी पेपर लीक होते हैं? जवाब है, बहुत कम या लगभग ना के बराबर। इसकी सबसे बड़ी वजह है वहां का डिजिटल एग्जाम सिस्टम। अमेरिका में MCAT परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित यानी CBT मोड में होती है। इसका मतलब है कि वहां फिजिकल प्रश्न पत्रों को एक शहर से दूसरे शहर या परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। और यही वह जगह है जहां भारत जैसे देशों में सबसे ज्यादा रिस्क पैदा होता है। दरअसल पेन-पेपर मोड वाली परीक्षाओं में प्रश्न पत्र परीक्षा केंद्रों तक 24 से 48 घंटे पहले पहुंचा दिए जाते हैं। इसी दौरान पेपर लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। लेकिन अमेरिका के सिस्टम में ऐसा नहीं होता है।
6 घंटे 15 मिनट की परीक्षा
MCAT परीक्षा की एक और खास बात यह है कि इसमें सभी छात्रों को अलग-अलग प्रश्नों के सेट मिलते हैं। यानी अगर कोई छात्र किसी तरह सवाल बाहर भी ले जाए तो वह पूरे देश के बाकी छात्रों के लिए बेकार साबित हो सकता है। इतना ही नहीं, यह परीक्षा एक ही दिन में आयोजित नहीं होती। इसके लिए अलग-अलग तारीखें तय की जाती हैं। इससे किसी बड़े स्तर की गड़बड़ी या सामूहिक लीक की संभावना काफी कम हो जाती है। करीब 6 घंटे 15 मिनट इस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में मिना जाता है।
क्या भारतीय छात्र हो सकते हैं शामिल ?
MCAT यानी Medical College Admission Test में भारतीय छात्र शामिल हो सकते हैं। यह परीक्षा मुख्य रूप से अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल स्कूलों में दाखिले के लिए आवश्यक होती है। इसके लिए भारतीय छात्रों के पास ग्रेजुएशन (जैसे- MBBS डिग्री या मेडिकल/बायोलॉजी से संबंधित बैचलर डिग्री) होनी चाहिए, या वे मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हों।
