PhD Backlog Rules: उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में पीएचडी (PhD) को सबसे प्रतिष्ठित डिग्री माना जाता है। लेकिन कई बार कोर्सवर्क या रिसर्च मूल्यांकन के दौरान सही जानकारी न होने या किसी विषय में अपेक्षित अंक न मिल पाने के कारण छात्रों की 'बैक' (Back) लग जाती है। ऐसी स्थिति में छात्रों में डिग्री रद्द होने का डर सामान्य है। क्योंकि इससे उन्हें साल बर्बाद होने का चिंता सताती है। हालांकि, पैनिक होने के बजाय आपको विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा तय किए गए नियमों और दिशा-निर्देशों को समझना और जानना चाहिए, ताकि इस स्थिति मे आपको क्या करना है और क्या नहीं पता रहे। इसके अनुसार आप अपनी डिग्री रद्द होने और साल बर्बाद होने से बचा सकते हैं।
पीएचडी कोर्सवर्क में क्या हैं UGC के न्यूनतम अंक नियम?
UGC Regulations के तहत, हर पीएचडी छात्र को रिसर्च कार्य यानी थिसीस (Thesis) शुरू करने से पहले 'कोर्सवर्क' सफलतापूर्वक पूरा करना अनिवार्य होता है। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए छात्रों को कम से कम 55 प्रतिशत अंक हासिल करने अनिवार्य है। यदि कोई छात्र कोर्सवर्क में 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल होता है तो ऐसी स्थिति में वह री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई कर सकता है। लेकिन यदि री-इवैल्यूएशन में भी वह पास नहीं होता है तो उस स्थिति में छात्र की उस विषय में बैक मानी जाएगी।
बैक आने पर क्या है आपके पास ऑप्शन
बैक आने का मतलब यह नहीं है कि छात्र का एडमिशन तुरंत कैंसिल कर दिया जाएगा और उसकी डिग्री रद्द हो जाएगी। डिग्री को कैंसिल होने से और एडमिशन रद्द होने से बचाने के लिए छात्रों को कई मौके दिए जाते हैं, अगर उस दौरान भी वह उसे पास करने में विफल रहता है तब जाकर डिग्री रद्द होती है।
1. सप्लीमेंट्री / री-अपीयर परीक्षा
यूजीसी के नियमानुसार, विश्वविद्यालयों के पास कोर्सवर्क परीक्षा में सुधार के लिए छात्रों को अतिरिक्त अवसर देने का नियम है। छात्र निर्धारित समय सीमा के भीतर री-अपीयर फॉर्म भरकर दोबारा परीक्षा दे सकते हैं।
2. गाइड और रिसर्च एडवाइजरी कमेटी से परामर्श
बैक लगने की स्थिति में तुरंत अपने रिसर्च सुपरवाइजर (Guide) और RAC से संपर्क करें। वे आपको विषय की कमियों को दूर करने और अगले प्रयास में बेहतर अंक लाने में मार्गदर्शन देंगे।
3. समय सीमा का ध्यान रखें
यूनिवर्सिटी द्वारा तय की गई अवधि (आमतौर पर अगले सेमेस्टर या 6 महीने के भीतर) में ही बैक का पेपर क्लियर करना होता है। ऐसा न करने पर पीएचडी रजिस्ट्रेशन पर असर पड़ सकता है।
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए दिल्ली की किसी यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे छात्र का कोर्सवर्क पेपर में 55% से कम स्कोर आया। यूजीसी नियमों के तहत, यूनिवर्सिटी उसे को अगले 6 महीने के भीतर आयोजित होने वाले सप्लीमेंट्री एग्जाम में बैठने का एक और मौका देगी। ऐसे में छात्र केवल उस खास विषय का री-अपीयर फॉर्म भरकर दोबारा परीक्षा दे सकता है और 55% से अधिक अंक लाकर अपना कोर्सवर्क क्लियर कर सकता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
क्या करें
यूनिवर्सिटी ऑर्डिनेंस पढ़ें - हर यूनिवर्सिटी के पास UGC गाइडलाइन के आधार पर अपना ऑर्डिनेंस होता है, उसकी नियम बुक जांचें।
समय पर फीस व फॉर्म भरें - बैक/री-अपीयर परीक्षा का नोटिफिकेशन आते ही तुरंत आवेदन करें।
क्या न करें
घबराएं नहीं - बैक लगने से पीएचडी खत्म नहीं होती, यह केवल कोर्सवर्क का एक हिस्सा है जिसे सुधारा जा सकता है।
देरी न करें - बैक पेपर को लटकाने से आपकी पीएचडी सिनॉप्सिस और थेसिस सबमिशन में देरी होगी।
छात्र ध्यान दें
पीएचडी की राह में बैक आना एक सामान्य अकादमिक चुनौती है, कोई अंतिम रुकावट नहीं है। यूजीसी के नियम छात्रों को अपनी गलतियों में सुधार करने और अपनी डिग्री पूरी करने का पूरा अवसर देते हैं। इसलिए, यदि आप भी कोर्सवर्क में न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जिसके कारण आपकी बैक आ गई है, तो बिना परेशान हुए री-अपीयर परीक्षा के लिए आवेदन करने और उसकी अच्छे से तैयारी कर परीक्षा पास करें।
