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प्राइमरी टीचर की नौकरी कितने घंटे होती है, क्यों कहते हैं सुकून वाली 'ड्रीम जॉब'

प्राइमरी टीचर्स की जॉब में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ अटेंडेंस, कॉपी चेकिंग और स्कूल की अन्य बेसिक जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। कई प्राइवेट नौकरियों की तरह यहां पर 9 से 10 घंटे लगातार काम करने का प्रेशर बिल्कुल भी नहीं रहता है और यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस जॉब को पसंद करते हैं।

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primary teacher working hours

Primary Teacher Working Hours : लाखों युवा शिक्षक बनने के सपने के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। ऐसे में छात्रों के मन में अकसर ये सवाल भी घूमता है कि शिक्षकों की ड्यूटी कितने घंटे की होती है, खासकर प्राइमरी टीचर्स की। ऐसा माना जाता है कि प्राइमरी टीचर एक ऐसा प्रोफेशन है, जो सबसे आरामदायक होता है। मगर क्या वाकई ऐसा है? और आखिर प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी कितने घंटे की होती है, चलिये जानते हैं।

सबसे पहले तो ये जान लेते हैं कि प्राइमरी शिक्षकों का काम क्या होता है। दरअसल, प्राइमरी टीचर्स की जॉब में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ अटेंडेंस, कॉपी चेकिंग और स्कूल की अन्य बेसिक जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। कई प्राइवेट नौकरियों की तरह यहां पर 9 से 10 घंटे लगातार काम करने का प्रेशर बिल्कुल भी नहीं रहता है और यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस जॉब को पसंद करते हैं।

क्या होता है प्राइमरी क्लासेज का समय ?

आमतौर पर प्राइमरी स्कूल का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे या फिर 2 बजे (लगभग 6 घंटे) तक रहता है। ऐसे में एक प्राइमरी टीचर की नौकरी 6 घंटे तक की होती है। हालांकि परीक्षा की कॉपियां चेक करने, लेसन प्लान तैयार करने और स्कूल के प्रशासनिक कार्यों के लिए एक्स्ट्रा समय देना पड़ता है।

वर्क लाइफ बैलेंस

सबसे खास बात ये है कि प्राइमरी टिचर्स को सालभर में गर्मी, सर्दी और त्योहारों की लंबी छुट्टियां मिलती हैं। कई युवा मानते हैं कि कम वर्किंग आवर्स और वर्क लाइफ बैलेंस की वजह से ही ये नौकरी दूसरे सरकारी विभागों की तुलना में काफी सुविधानजनक महसूस होती है। खासकर महिलाओं के बीच इस नौकरी को लेकर काफी क्रेज है।

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत, भारत में प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को प्रति सप्ताह कम से कम 45 घंटे काम करना अनिवार्य है (इसमें तैयारी का समय भी शामिल है)। इसके अतिरिक्त, उन्हें कक्षा 1 से 5 तक के लिए, प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 200 कार्य दिवस और 800 शिक्षण घंटे पूरे करना आवश्यक है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि प्राइमरी शिक्षकों का काम कम घंटों का होता है। छोटे बच्चों को संभालना, उन्हें शुरुआती शिक्षा देना और उनकी बेसिक स्किल्स को विकसित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। एक अच्छे शिक्षक को बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर भी लगातार ध्यान देते रहना पड़ता है।

तेजी से लोकप्रिय हो रही ये नौकरी

इसके बावजूद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच MCD प्राइमरी टीचर की नौकरी समय के साथ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कई अभ्यर्थी इसे ऐसी नौकरी मानते हैं, जिसमें सम्मान, स्थिरता और बेहतर जीवनशैली तीनों का बैलेंस देखने को मिलता है।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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