IAS-IPS की फैक्ट्री है यूपी का ये कॉलेज, UPSC टॉपर आदित्य श्रीवास्तव भी यहीं से पढ़े
- Authored by: कुलदीप राघव
- Updated Feb 17, 2026, 02:09 PM IST
UPSC Topper Aditya Srivastava IAS college IIT Kanpur: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित सिविल सर्विस एग्जाम का रिजल्ट जब भी आता है तो यूपी के एक कॉलेज का जिक्र ना हो ऐसा नहीं हो सकता है। यूपीएससी टॉपर्स की लिस्ट में इस कॉलेज का कोई ना कोई छात्र जरूर होता है। यह कॉलेज है यूपी के कानपुर में जो हर साल देश को आईएएस, आईपीएस देता है। यूपीएससी टॉपर 2023 आदित्य श्रीवास्तव भी यहीं के छात्र रहे।
IAS-IPS की फैक्ट्री है यूपी का ये कॉलेज
UPSC Topper Aditya Srivastava IAS college IIT Kanpur: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित सिविल सर्विस एग्जाम का रिजल्ट जब भी आता है तो यूपी के एक कॉलेज का जिक्र ना हो ऐसा नहीं हो सकता है। यूपीएससी टॉपर्स की लिस्ट में इस कॉलेज का कोई ना कोई छात्र जरूर होता है। यह कॉलेज है यूपी के कानपुर में जो हर साल देश को आईएएस, आईपीएस देता है। यूपीएससी टॉपर 2023 आदित्य श्रीवास्तव भी यहीं के छात्र रहे। टॉपर्स की लिस्ट में इस कॉलेज के छात्रों का होना स्वाभाविक है। यह कॉलेज है यूपी के कानपुर में जो हर साल देश को आईएएस, आईपीएस देता है। UPSC 2023 के परिणाम घोषित हुए तो लखनऊ के रहने वाले आदित्य श्रीवास्तव ने इस परीक्षा में टॉप किया। आदित्य भी यहां के स्टूडेंट रहे थे।
1959 में हुई थी इस कॉलेज की स्थापना
इस कॉलेज का इतिहास काफी पुराना है। 1959 में इसकी स्थापना हुई थी। क्या आप इसका नाम जानते हैं। अगर नहीं तो आज जान लें ।ये संस्थान है भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी कानपुर। यूपीएससी में टॉप करने वाले आदित्य श्रीवास्तव ने भी आईआईटी कानपुर से ही पढ़ाई की।

1959 में हुई थी इस कॉलेज की स्थापना
यूपीएससी में 600 छात्रों का चयन
आईआईटी कानपुर के एलुमनाई एसोसिएशन से मिले डाटा के अनुसार आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक करने वाले वाले लगभग 600 छात्र यूपीएससी और लगभग 300 अलग अलग सिविल सर्विसेज में हैं। मीडिया रिपोर्ट का दावा है कि आईआईटी कानपुर से अब तक 600 बच्चे सिविल सर्विसेज में चयनित हो चुके हैं। वे आईआईटी कानपुर के एलुमनाई रहे हैं या फिर उन्होंने आईआईटी कानपुर से कोई पढ़ाई की है।

यूपीएससी में 600 छात्रों का चयन
आईआईटी कानपुर (IITK) की स्थापना 1959 में कानपुर के हारकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (HBTI) कैंपस में एक सोसायटी के रूप में हुई थी, जिसके पहले निदेशक डॉ. पी.के. केलकर थे। 1963 में यह कल्याणपुर स्थित अपने वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित हुआ और 1962-72 के दौरान कानपुर इंडो-अमेरिकन प्रोग्राम (KIAP) के तहत 9 अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर विकसित किया गया। यह भारत में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा शुरू करने वाला पहला संस्थान था।
