न्यूजीलैंड के खिलाफ 1995 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए डेब्यू करने वाले और विपरीत परिस्थिति में इस टीम को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने वाले अंजुम चोपड़ा को आईसीसी के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। वह तीसरी भारतीय महिला क्रिकेटर बनी हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला। ओवरऑल अंजुम इस लिस्ट में शामिल होने वाली 13वीं भारतीय बनी हैं। महिला क्रिकेट की बात करें तो इससे पहले नीतू डेविड (2024) और डायना एडुल्जी (2023) को यह सम्मान मिल चुका है। 17 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में अंजुम ने 3,500 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाए। वह 100 वनडे और 6 वर्ल्ड कप खेलने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं।
इस सम्मान को पाने के बाद अंजुम चोपड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा 'परिवार में खेल का माहौलल था और उसी में, मैं पली-बढ़ी। मैंने क्रिकेट के महान खिलाड़ियों और उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों की कहानियां सुनी थीं। भारत के लिए खेलने का सपना मेरे मन में बहुत पहले से था। मेरे माता-पिता, शिक्षकों और कोचों ने मुझे बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया, जो कठिन समय में हमेशा मेरे साथ खड़े रहे।”
“मुझे खेल प्रशासकों का समय पर सहयोग भी मिला, जिसके चलते मैंने गर्व से भारतीय टीम की जर्सी पहनी। खेल के महानतम खिलाड़ियों में शामिल होना मेरे लिए एक पुरस्कार है, उन सभी लोगों के लिए जिन्होंने मेरे करियर को संवारने में मदद की है। मैं उन सभी का आभारी हूं और आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने से बेहद खुश हूं।”
अंजुम चोपड़ा का रोल भारतीय महिला क्रिकेट में इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने उस फेज में क्रिकेट खेला जब महिला क्रिकेट बदलाव की दौर से गुजर रहा था। इस दौरान उन्होंने भारतीय टीम को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इससे पहले उन्हें साल 2016 में एमसीसी की मानद आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया गया था। वो यह सम्मान पाने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर भी बनी थीं।
