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चौकी के बगल में चलती है पुलिस सर की क्लास, खुद बनना चाहते थे IPS-अब देते हैं फ्री ट्यूशन

  • Curated by: प्रभाष रावत
  • Updated Dec 22, 2022, 02:44 PM IST

UP Police Constable Sir Free Tuition Class: उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल यानी सिपाही के रूप में कार्यरत मोहम्मद जाफर एक आईपीएस अधिकारी बनना चाहते थे लेकिन अपना सपना पूरा ना होने के बाद वह छोटे बच्चों के नन्हीं आंखों के सपने पूरे करने के लिए काम कर रहे हैं।

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UP पुलिस कांस्टेबल दे रहा ट्यूशन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Photo : iStock

कहावत में सही लेकिन ऐसा कहा जाता है कि विद्या दान से बड़ा कोई दान नहीं होता है और इसे परंपरागत रूप से भी सबसे बड़े पुण्य वाले कामों में से एक माना जाता है। कुछ इसी तरह का काम कर रहा है यूपी पुलिस का एक सिपाही, जो खुद एक आईपीएस अफसर बनना चाहता था लेकिन यह सपना पूरा ना हो सका और बाद में मोहम्मद जाफर को उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही की नौकरी मिली। भले ही बड़े पद पर पहुंचकर सेवा करने का उनका खुद का सपना पूरा ना हो सका हो लेकिन सुविधाओं के अभाव में नई पीढ़ी के सामने भी यह समस्या आए यह मोहम्मद जाफर नहीं चाहते हैं।

बस यही कारण है कि गांव के छात्रों के लिए फ्री ट्यूशन की पहल करके मोहम्मद जाफर ने अपने किए शोहरत कमाने के साथ यूपी पुलिस का नाम भी रोशन कर दिया है। मामला गोंडा जिले के अंतिम छोर पर स्थित सुदूर चचरी का है, जहां पर पुलिस चौकी के बगल में ही एक पेड़ के नीचे पुलिस सर की पाठशाला भी चलती है।

यहां पर वह रोजाना एक घंटे के लिए कक्षा 1 से 10वीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं। यहां पर पुलिस सर की ओर से गणित और साइंस के बारे में बच्चों को बताया जाता है। इस पाठशाला में कई छात्र नवोदय विद्यालय में एडमिशन के लिए तैयारी को लेकर पढ़ाई करते हैं। इस ट्यूशन क्लास से बच्चें और उनके माता-पिता भी बहुत प्रभावित हैं।

इस बारे में बोलते हुए सिपाही मोहम्मद जाफर ने कहा कि अपनी ड्यूटी के टाइम के बाद रोजाना वह बच्चों को पढ़ाने का विकल्प चुनना पसंद करते हैं। आईएएस का उनका जो सपना था वह पूरा नहीं हो सका लेकिन अब वह चाहते हैं कि उनके पढ़ाए बच्चों में से अगर कोई कामयाब हुआ तो उनकी दिल की ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। हर रोज शाम 4 बजे चचरी पुलिस चौकी के बगल में पेड़ के नीचे पुलिस सर की पाठशाला चलती है।

प्रभाष रावत
प्रभाष रावतauthor

रक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक विषयों में विशेष रुचि रखने वाले प्रभाष रावत कुछ-ना-कुछ नया सीखते रहने में विश्वास करते हैं। बीते 5 साल से ज्यादा समय में पत्रकारिता की कई बीट पर काम करने का अनुभव। साथ ही संवाद और लेखन से खुद को व्यक्त करने के अलावा आध्यात्म भी इनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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