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UGC New Courses: यूजीसी ने दी 33 नए एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स को मंजूरी, बदले गए कई प्रोग्राम के नाम और अवधि

UGC New Courses: यूजीसी ने देश में एलाइज और हेल्थकेयर शिक्षा को बेहतर बनाने और इसमें समानता लाने के लिए नए 33 एलाइड कोर्स को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कई प्रोग्राम के नामों में बदलाव किया गया है तो वहीं कई कोर्स की अवधि में बदलाव हुआ है।

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UGC New Courses (Photo - AI)

UGC New Courses: देश में एलाइड और हेल्थकेयर शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने तथा उसमें समानता लाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बड़ा फैसला लिया है। नेशनल कमीशन फॉर एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) की सिफारिशों पर यूजीसी ने अपने स्वीकृत कोर्स की सूची में एक या दो नहीं, बल्कि 33 नए एलाइड और हेल्थकेयर डिग्री कोर्स को शामिल किया है। इतना ही नहीं, इसके साथ कई प्रमुख अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स के नाम और उनकी अवधि में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में हेल्थकेयर शिक्षा के ढांचे, नामांकनों और अकादमिक मानकों को सुव्यवस्थित तथा मानकीकृत करना है।

'एक देश, एक करिकुलम' का लक्ष्य और 17 विषय

NCAHP की चेयरपर्सन यज्ञ शुक्ला के अनुसार, यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों (Discrepancies) को दूर करने में सहायक साबित होग। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से साइकोलॉजी, मेडिकल और साइकियाट्रिक सोशल वर्क जैसे विषयों में कोर्स के नाम और संरचना को लेकर काफी भिन्नताएं थी, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है।

इसके साथ ही Vision 2030 के तहत यूजीसी वर्ष 2030-31 तक "एक देश, एक करिकुलम" मॉडल को लागू करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप कार्य कर रहा है। इसके तहत 17 मेडिकल क्षेत्र शामिल किए गए हैं। नए और संशोधित कोर्स मेडिसिन और सर्जरी, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, फार्मेसी, पैरामेडिकल साइंसेज, नर्सिंग और एलाइड हेल्थकेयर जैसे 17 अलग-अलग विषयों से जुड़े हैं। बता दें कि इन सभी 17 क्षेत्रों के लिए एक जैसा कोर्स, संस्थानों के लिए दिशानिर्देश और प्रवेश के न्यूनतम मानदंड तय किए गए हैं।

प्रमुख कोर्स की अवधि में बदलाव

छात्रों को बता दें कि संशोधित अकादमिक मानकों के तहत कई लोकप्रिय बैचलर और मास्टर डिग्री कोर्स की अवधि को बढ़ाया गया है। उसकी जानकारी इस प्रकार है -

बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री (BOptom)इसकी अवधि को 4 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (BOT)इस कोर्स की अवधि को भी बढ़ाकर 5 साल किया गया है।
बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT)इसे पहले की 4.5 साल की अवधि से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।

इन कोर्स की होगी रीस्ट्रक्टचरिंग

यूजीसी ने मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) और मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) चलाने वाली यूनिवर्सिटीज को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कोर्स को नए सिरे से रीस्ट्रक्चर करें और नए निर्धारित नाम के तहत ही छात्रों को डिग्री प्रदान करें।

एग्जीक्यूशन और राज्य स्तर पर चुनौतियां

इस जनरलाइजेशन को साल 2026-27 के अकादमिक सत्र से पूरे देश में लागू करने की योजना है। हालांकि इसे करना इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि इसके तहत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अनिवार्य 'स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल' (SAHC) का गठन नहीं किया है। इतना ही नहीं कुछ राज्यों में बनाई गई काउंसिल्स 'NCAHP एक्ट' के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप नहीं हैं, जिससे जमीनी स्तर पर इन सुधारों को पूरी तरह लागू करने में बाधा आ रही है। इसके बावजूद, यूजीसी का यह कदम भारतीय हेल्थकेयर शिक्षा को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करने और छात्रों के लिए डिग्रियों की विश्वसनीयता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होगा।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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