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NCLT ने सुभाष चंद्रा के दिवाला मामले में जारी किए नोटिस, संपत्ति बेचने पर रोक

जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा को पर्सनल गारंटर और दिवाला मामले में NCLT ने नए नोटिस जारी किए हैं। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने उन पर संपत्ति बेचने पर भी रोक लगा दी है।

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सुभाष चंद्रा को झटका

NCLT Notice to Subhash Chandra : Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में NCLT ने मंगलवार को अहम अंतरिम निर्देश दिया। मामले की सुनवाई कर रही 5 सदस्यीय विशेष पीठ ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही चंद्रा पर उनकी संपत्तियां सीधे या किसी अप्रत्यक्ष तरीके से बेचने या ट्रांसफर करने से रोक लगा दी है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि मामले में पीठ के सदस्यों के बीच बहुमत की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण फिलहाल कोई अंतिम आदेश प्रभावी नहीं किया जा सकता। पीठ अब पूरे मामले का दायरा समझना चाहती है और सभी संबंधित पक्षों, खासकर असहमत कर्जदाताओं, को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

संपत्ति ट्रांसफर करने पर रोक

सुनवाई के दौरान NCLT ने स्पष्ट निर्देश दिया कि गारंटर अपनी संपत्तियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर नहीं कर सकता। यानी मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रा अपनी निजी संपत्ति को बेचने, किसी दूसरे व्यक्ति के नाम करने या किसी अन्य तरीके से उसका हस्तांतरण करने की कोशिश नहीं कर सकेंगे। पीठ ने कहा कि सभी पक्ष अपनी चिंताएं और आपत्तियां उसके सामने रख सकते हैं। इसके बाद अगली तारीख के आसपास सामने आए कानूनी और प्रक्रियात्मक सवालों पर विचार किया जाएगा। न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीठ पहले यह समझना चाहती है कि मामला किस दायरे में आता है और किन मुद्दों पर निर्णय की जरूरत है। उन्होंने असहमत कर्जदाताओं को भी अपनी बात रखने का मौका दिया।

₹22,006 करोड़ के दावों पर क्या है विवाद?

मामले में सुभाष चंद्रा के खिलाफ कर्जदाताओं के दावों की कुल रकम करीब ₹22,006 करोड़ बताई गई है। वहीं, पिछले सप्ताह मंजूर की गई पुनर्भुगतान योजना के तहत उनकी निजी संपत्ति से कर्जदाताओं को करीब ₹6.25 करोड़ की वसूली होने की बात कही गई थी। हालांकि, चंद्रा का कहना है कि ₹22,006 करोड़ को उनकी व्यक्तिगत देनदारी के तौर पर समझना सही नहीं है। उनके मुताबिक, यह रकम उन दावों को दिखाती है जो Essel Group से जुड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े हैं। यही वजह है कि इस मामले में व्यक्तिगत गारंटी, कर्जदाताओं के दावे और चंद्रा की निजी संपत्ति से होने वाली संभावित वसूली को लेकर विवाद बना हुआ है।

क्यों तीसरे सदस्य तक पहुंचा मामला?

NCLT की दो सदस्यीय पीठ में रीपेमेंट की योजना को लेकर एक राय नहीं बन पाई। न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने योजना पर अलग-अलग फैसले दिए थे। इसके बाद मामले को तीसरे सदस्य के पास भेजा गया। तीसरे सदस्य के आदेश के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों ने आपत्ति जताई। ये बैंक मामले में असहमत कर्जदाता हैं। उन्होंने करीब ₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले चंद्रा की निजी संपत्ति से सिर्फ करीब ₹6.25 करोड़ की वसूली के प्रावधान को चुनौती दी। इसके बाद बैंकों ने इस आदेश के खिलाफ NCLAT का रुख किया।

अब NCLAT में भी होगी सुनवाई

NCLT में मंगलवार की सुनवाई खत्म होने के तुरंत बाद NCLAT में भी इस मामले की सुनवाई हुई। LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank समेत अन्य असहमत कर्जदाताओं की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए NCLAT ने अब इसे बुधवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस तरह सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में एक तरफ NCLT में संपत्तियों के ट्रांसफर पर रोक जारी है, वहीं दूसरी तरफ असहमत कर्जदाताओं की चुनौती पर NCLAT में भी सुनवाई आगे बढ़ रही है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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