Success Story of IAS Himanshu Nagpal: कहते हैं जितना कठिन सिविल सर्विस परीक्षा क्रैक करना होता है उतना ही कठिन बतौर IAS-IPS काम करना होता है। यूपीएससी परीक्षा क्रैक करने वाले युवाओं के अंदर समाज के प्रति कुछ कर दिखाने का अलग ही जज्बा होता है। ऐसा ही एक उदाहरण है UPSC 2018 बैच के आईएएस हिमांशु नागपाल। बतौर आईएएस ऑफिसर उन्होंने ऐसा काम कर दिखाया है कि उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है।
आईएएस हिमांशु नागपाल का नाम 'मिशन मुस्कान' की सफलता के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में आया। हरियाणा के रहने वाले IAS हिमांशु का नाम देश के सबसे कम उम्र के आईएएस अधिकारियों में शामिल है। बेहद कम उम्र में उन्होंने कई ऐसे काम किए हैं जिसकी प्रशंसा की जाएगी। आइए उनके करियर पर एक नजर डालते हैं।
हिंदी मीडियम से की पढ़ाई
आईएएस हिमांशु नागपाल हरियाणा के रहने वाले हैं। एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले हिंमांशु की स्कूलिंग हिंदी मीडियम स्कूल से हुई है। शुरू से पढ़ाई में अव्वल हिमांशु को 10वीं में 80% और 12वीं में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। स्कूलिंग के बाद वो दिल्ली आ गए और दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से उन्होंने बीकॉम किया। ग्रेजुएशन के दौरान ही हिमांशु का मन सिविल सर्विस में जाने का हुआ।
पिता और भाई की मौत
हिमांशु जब कॉलेज में थे जभी एक एक्सीडेंट में उनके पिता की मौत हो गई। अचानक पिता को खोने का दु:ख अभी ठीक से भरा नहीं था कि कुछ समय बाद ही उनके भाई की भी मौत हो गई। हिमांशु के परिवार में घटी इन घटनाओं ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। हिमांशु के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। खुद को संभालते हुए उन्होंने किसी तरह से यूपीएससी की परीक्षा दी।
हिमांशु बताते हैं कि साल उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए कभी कोई कोचिंग नहीं की। उनके पिता का सपना था कि हिमांशु सिविल सर्विस में जाएं। यूपीएससी 2018 की परीक्षा में हिमांशु का सेलेक्शन हो गया। उन्हें ऑल ओवर इंडिया रैंक 26 प्राप्त हुआ और वो आईएएस के लिए चुने गए। हिमांशु ने सिर्फ सेल्फ स्टडी के बलबूते मात्र 22 वर्ष की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। उनका चयन यूपी कैडर में हुआ।

आईएएस हिमांशु नागपाल
मिशन मुस्कान के लिए किया काम
आईएएस सेलेक्ट होने के बाद हिमांशु को सहारनपुर, जौनपुर, कानपुर और वाराणसी जिले में पोस्टिंग मिली। वाराणसी में बतौर सीडीओ काम करते हुए उन्होंने मिशन मुस्कान की शुरुआत की। हिमांशु नागपाल ने माता-पिता से बिछड़ गए बच्चों को मिलने के लिए काम करना शुरू किया। बता दें कि उन्होंन इस मिशन के तहत 700 से ज्यादा सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों को उनके परिवार से मिलवाया है।
आईएएस हिमांशु सड़कों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भटकते हुए बच्चों के लिए काम करते हैं। उन्हें परिवार से मिलाने की कोशिश करते हैं। साथ ही मिशन मुस्कान के तहत बेसहारा बच्चों की देखभाल और काउंसलिंग की भी जिम्मेदारी उठाते हैं।
