JEE Advanced: देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में प्रवेश के लिए हर साल जेईई एडवांस की परीक्षा का आयोजन किया जाता है, इसमें सफलता प्राप्त करने वाले छात्रों को उनके अंकों के आधार पर संस्थान और कोर्स मिलता है। हाल ही में इस परीक्षा के नियमों में बदलाव को लेकर मांग उठ रही है। लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों का मानना है कि परीक्षा के लिए निर्धारित मौकों यानी अटेम्प्ट की संख्या को दो बार की सीमा से बढ़ाकर तीन बार किया जाना चाहिए। बता दें कि वर्तमान में लागू नियम के अनुसार छात्रों को 12वीं कक्षा के साथ और उसके ठीक बाद जेईई एडवांस्ड परीक्षा देने के लिए केवल दो लगातार अवसर ही मिलते हैं। छात्रों का तर्क है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति, बीमारी या अन्य कारणों से अगर उनका एक मौका प्रभावित होता है, तो उन्हें दोबारा बेहतर तैयारी के साथ खुद को साबित करने का अवसर नहीं मिल पाता।
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जेईई एडवांस के पुराने नियम और वर्तमान स्थिति
आईआईटी में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली इस प्रवेश परीक्षा के नियम अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तुलना में काफी सख्त माने जाते हैं। इसके नियमों के बारे में विस्तार में बात करें तो वह इस प्रकार है -
अटेंप्ट की सीमा: वर्तमान व्यवस्था के तहत, एक अभ्यर्थी लगातार केवल दो बार ही जेईई एडवांस्ड परीक्षा में शामिल हो सकता है। पहला मौका छात्र को अपनी 12वीं की बोर्ड परीक्षा वाले वर्ष में मिलता है और दूसरा मौका उसके अगले वर्ष। इसके बाद वह जेईई एड़वांस की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते।
गैप ईयर पर पाबंदी: यदि कोई छात्र 12वीं पास करने के बाद एक वर्ष से अधिक का ब्रेक (Drop) लेता है, तो वह जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य हो जाता है।
जेईई मेन से भिन्नता: जहां नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली जेईई मेन परीक्षा में छात्रों को लगातार तीन वर्षों (कुल 6 अवसर) तक बैठने की अनुमति होती है, वहीं जेईई एडवांस्ड में यह अवसर केवल दो वर्षों तक ही सीमित रखा गया है।
क्या है छात्रों की प्रमुख मांगें
विद्यार्थियों और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कई मांग की है। उनकी सबसे पहली मांग जेईई एडवांस के लिए अवसरों की संख्या को दो से बढ़ाकर तीन बार की जाए, ताकि 12वीं के बाद दो ड्रॉप ईयर (Drop Years) लेने वाले छात्र भी इस परीक्षा में हिस्सा ले सकें। इसके साथ ही उनका कहना है कि जब जेईई मेन में तीन साल का अवसर दिया जाता है, तो एडवांस्ड परीक्षा में भी वही नियम लागू होना चाहिए। कई बार छात्र बीमारी, मानसिक तनाव या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपनी 12वीं की परीक्षा वाले साल या पहले ड्रॉप ईयर में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। तीसरा मौका मिलने से ऐसे प्रतिभावान छात्रों का भविष्य खराब नहीं होता और उन्हें परीक्षा में शामिल होने का एक मौका और मिल पाएगा।
अतिरिक्त मौका मिलने से क्या होंगे फायदे?
मानसिक दबाव में कमी: परीक्षा की सीमित संख्या के कारण छात्रों पर अत्यधिक मानसिक तनाव रहता है। तीन अवसर मिलने से उम्मीदवारों को अपनी तैयारी सुधारने का एक और मौका मिलेगा और उन पर दबाव कम होगा।
ग्रामीण और कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों को राहत: दूर-दराज के इलाकों या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों को जेईई की जटिल परीक्षा प्रणाली को समझने और उसकी सही रणनीति बनाने में अक्सर अधिक समय लगता है। एक अतिरिक्त प्रयास उनके लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
आईआईटी को मिलेगी बेहतर प्रतिभा: ज्यादा छात्रों को प्रतिस्पर्धा का मौका मिलने से आईआईटी संस्थानों को भी अधिक परिपक्व और योग्य अभ्यर्थी मिल सकेंगे।
छात्रों द्वारा शिक्षा मंत्रालय और आईआईटी की संयुक्त प्रवेश बोर्ड (JAB) से गुहार लगाई जा रही है कि वह छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस नियम पर पुनर्विचार करें और प्रवेश नीति में उचित ढील प्रदान करें।
