CBSE Class 12 Copy Re-Evaluation: सीबीएसई कक्षा 12वीं के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जिन छात्रों को अपनी बोर्ड परीक्षा की कॉपी की जांच या मिले अंकों को लेकर आपत्ति थी, उनके लिए दोबारा वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन का पोर्टल खोलने की मांग की गई थी। लेकिन आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि CBSE पहले ही सभी उम्मीदवारों के लिए एक तय समय तक वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की सुविधा उपलब्ध करा चुका था। इसलिए अब सामान्य तौर पर पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने का कोई आधार नहीं है।
छात्रों ने पोर्टल दोबारा खोलने की मांग क्यों की थी?
मामला CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इस सिस्टम में छात्रों की फिजिकल आंसर शीट को पहले स्कैन किया जाता है। इसके बाद शिक्षक कंप्यूटर पर उस स्कैन कॉपी को देखकर उसका मूल्यांकन करते हैं।
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याचिका में दावा किया गया था कि कुछ छात्रों को इस प्रक्रिया के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में कॉपी के पन्ने स्कैन नहीं होने, स्कैन की गुणवत्ता खराब होने या उत्तरों का मूल्यांकन नहीं होने जैसी शिकायतें सामने आने की बात कही गई।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि CBSE की वेबसाइट में तकनीकी दिक्कतों के कारण कई छात्र निर्धारित समय में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन नहीं कर पाए। इसी आधार पर पोर्टल को एक सप्ताह के लिए फिर से खोलने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पोर्टल दोबारा खोलने की मांग पर सवाल किया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि जब सुविधा सभी उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित समय तक उपलब्ध थी, तो अब इसे दोबारा खोलने का निर्देश क्यों दिया जाए। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति तय समय पर उपलब्ध अवसर का इस्तेमाल नहीं करता है, तो बाद में उसी अवसर को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग नहीं की जा सकती।
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