दिल्ली के जंतर-मंतर और रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाद अब पटना के गर्दनीबाग में छात्र आंदोलन शुरू हो गया है। आंदोलन के बीच पटना में स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब 25 अगस्त को अभ्यर्थियों ने मार्च निकालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बाद में स्थिति तनावपूर्ण हुई और लाठीचार्ज की खबर सामने आई। पत्थरबाजी में एक DSP के घायल होने की भी रिपोर्ट है। पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। सवाल यह है कि आखिर बिहार में ऐसा क्या हुआ कि शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए? और जब सरकार ने शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, तब भी आंदोलन क्यों नहीं रुका?
पटना आंदोलन क्यों शुरू हुआ
पटना में चल रहा आंदोलन मुख्य रूप से BPSC की शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। हाल ही में 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। बिहार में TRE-4 यानी शिक्षक भर्ती परीक्षा की अधिसूचना जारी होने का उम्मीदवार लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। इसे लेकर पटना में प्रदर्शन शुरू हुआ और BPSC यानी बिहार लोक सेवा आयोग ने 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसे सरकार की ओर से बड़ा कदम माना गया, लेकिन उम्मीदवारों की कई मांगें इससे खत्म नहीं हुईं।
छात्रों की मांग क्या है?
बिहार लोक सेवा आयोग ने शिक्षक भर्ती परीक्षा में पहली बार निगेटिव मार्किंग का प्रावधान किया है। इसी के साथ पहली बार इस भर्ती परीक्षा में प्री और मेन्स का पैटर्न लागू किया है। यही वो बदलाव हैं जो छात्रों की नाराजगी का कारण बन रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE-4 में दो चरणों में परीक्षा कराने और निगेटिव मार्किंग लागू करने से परीक्षा की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा कठिन हो जाएगी। उनकी मांग है कि परीक्षा को एक चरण में कराया जाए और निगेटिव मार्किंग को हटाया जाए।
प्रमुख मांग
दरअसल, बिहार लोक सेवा आयोग ने शिक्षक भर्ती परीक्षा में पहली बार निगेटिव मार्किंग का प्रावधान किया है। इसी के साथ पहली बार इस भर्ती परीक्षा में प्री और मेन्स का पैटर्न लागू किया है। यही वो बदलाव हैं जो छात्रों की नाराजगी का कारण बन रहे हैं।
