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'कांदा एक्सप्रेस' प्याज के दामों पर लगाएगी लगाम, दिल्ली-NCR समेत इन शहरों में मिलेगा 35 रुपये किलो, जानें कहां से खरीदें

Onion Price: दिल्ली-NCR समेत देश भर में चीनी के बाद प्याज की कीमतों ने हाहाकार मचा दिया। आम लोगों के घर का बजट बिगड़ दिया है। दामों पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

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नासिक से चली 'कांदा एक्सप्रेस': ₹35 में मिलेगा प्याज, सरकार का बड़ा फैसला

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Onion Price : चीनी के बाद देशभर में प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। लेकिन अब दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और आम जनता को सस्ते दाम पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत महाराष्ट्र के नासिक से एक विशेष मालगाड़ी, जिसे 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है, प्याज की बड़ी खेप लेकर दिल्ली पहुंच रही है। इस योजना के लागू होने के बाद दिल्ली-NCR के लोगों को सिर्फ 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज मिलने लगेगा। फिलहाल प्याज की कीमत 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

क्या है 'कांदा एक्सप्रेस' और सरकार की योजना?

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार अपने सुरक्षित भंडार (बफर स्टॉक) से करीब 800 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली भेज रही है। इतनी विशाल मात्रा में प्याज की ढुलाई के लिए रेलवे का सहारा लिया गया है। इस स्पेशल ट्रेन के बुधवार या गुरुवार तक दिल्ली पहुंचने की संभावना है। सरकार की रणनीति यह है कि जैसे ही यह प्याज दिल्ली पहुंचेगा, इसे तुरंत बाजार में सब्सिडी वाले दामों पर उतार दिया जाएगा, ताकि प्याज की आसमान छूती कीमतों को फौरन नीचे लाया जा सके।

कहां और कैसे मिलेंगे 35 रुपये किलो वाले प्याज?

आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह सस्ता प्याज कहां से खरीदा जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) इसी सप्ताह से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कम दाम पर प्याज की बिक्री शुरू कर देगा। शुरुआती चरण में, NCCF दिल्ली-NCR में अपने 10 रिटेल आउटलेट्स (खुदरा दुकानों) के जरिये प्याज बेचेगा। इसके अलावा, NCCF द्वारा संचालित 105 'भारत ब्रांड' रिटेल स्टोर्स पर भी 35 रुपये प्रति किलो वाला यह प्याज उपलब्ध कराया जाएगा। सिर्फ NCCF ही नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और केंद्रीय भंडार के स्टोर्स पर भी लोग इस सब्सिडी वाले प्याज को खरीद सकेंगे। लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने दिल्ली-NCR के विभिन्न इलाकों में मोबाइल वैन (चलती-फिरती दुकानों) के जरिए भी प्याज बेचने की व्यवस्था की है।

किन अन्य शहरों को मिलेगा इस योजना का लाभ?

सरकार की यह मूल्य नियंत्रण योजना केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, शुरुआत में बफर स्टॉक का प्याज देश के 5 प्रमुख खपत वाले केंद्रों (जहां प्याज सबसे ज्यादा खाया जाता है) में भेजा जाएगा। इन शहरों में दिल्ली के साथ-साथ चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी शामिल हैं। कांदा एक्सप्रेस के जरिए इन शहरों में भी प्याज पहुंचाया जाएगा। इसके बाद, बाजार की मांग और उभरती हुई जरूरतों को देखते हुए भविष्य में अन्य शहरों को भी इस लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।

बाजार में प्याज की कीमतों में कितना आया है उछाल?

पिछले कुछ हफ्तों में प्याज की कीमतों में भारी और तेज बढ़ोतरी देखी गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में पूरे भारत में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 44.72 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अगर इसकी तुलना पिछले साल की इसी अवधि (27.37 रुपये प्रति किलो) से करें, तो यह 59 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। थोक बाजार में भी प्याज 3,673 रुपये प्रति क्विंटल (100 किलो) के पार बिक रहा है। अगर महानगरों की बात करें, तो दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख बाजारों में खुदरा कीमत 55 से 60 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है। कोलकाता में भी इसकी कीमत 53 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल इन्हीं दिनों दिल्ली में प्याज 35 रुपये और चेन्नई में मात्र 33 रुपये किलो के भाव पर बिक रहा था।

क्यों महंगे होते हैं प्याज और क्या है 'बफर स्टॉक'?

आमतौर पर हर साल अगस्त और सितंबर के महीनों में प्याज की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके कई कारण हैं, जैसे- त्योहारी सीजन के कारण मांग का बढ़ना, बारिश और खराब मौसम के चलते सप्लाई चैन (आपूर्ति सीरीज) में रुकावट आना और पुरानी फसल का खत्म होना। ऐसी मौसमी कमी और महंगाई से निपटने के लिए ही केंद्र सरकार 'बफर स्टॉक' (आपातकालीन भंडार) रखती है। सरकार 'मूल्य स्थिरीकरण कोष' (प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड) के तहत NCCF और NAFED जैसी एजेंसियों के जरिए किसानों से सीधे प्याज खरीदती है। जब भी बाजार में सप्लाई घटती है और दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो सरकार इसी स्टॉक से प्याज निकालकर बाजार में भेजती है, जिससे कीमतें नियंत्रण में आ जाती हैं। इस साल किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने प्याज की खरीद कीमत (प्रोक्योरमेंट प्राइस) भी 13% बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है, जो पहले 1,875 रुपये थी।

देश में प्याज की कोई कमी नहीं

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के अंदर प्याज की कोई कमी नहीं है। उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई से जून) में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन (LMT) है। यह आंकड़ा पिछले साल के 307.67 LMT के उत्पादन के बिल्कुल अनुरूप है। इसका मतलब है कि पैदावार पूरी है, बस बारिश और मौसम के कारण सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा था, जिसे अब 'कांदा एक्सप्रेस' और बफर स्टॉक के जरिए पूरी तरह से सुधारा जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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