Odisha सरकार ने राज्य के छात्रों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किंडरगार्टन यानी KG से लेकर पोस्टग्रेजुएट (PG) स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने 'ज्ञानोदय-शिक्षासु समृद्धि: KG से PG तक मुफ्त शिक्षा' योजना (Free Education) को हरी झंडी दिखा दी है। यह योजना आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू की जाएगी।
सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों में एडमिशन फीस होगी माफ
मुख्यमंत्री माझी ने इस फैसले को देश भर में अपनी तरह की पहली और "ऐतिहासिक" पहल बताया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में रेगुलर कोर्स में दाखिला लेने वाले सभी योग्य छात्रों की एडमिशन फीस पूरी तरह से माफ कर दी जाएगी।
किन छात्रों को मिलेगा इस योजना का लाभ
- सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के सभी छात्र।
- राज्य के पब्लिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में अंडर-ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्र
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नामांकन बढ़ेगा और ड्रॉपआउट में आएगी कमी
बता दें कि ओडिशा में पहले से ही कक्षा 8वीं तक की शिक्षा मुफ्त दी जा रही है। अब इस नई पहल को शुरू करने के सात मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का यह दायरा बढ़कर सीधे पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) स्तर तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र केवल पैसों की तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी कम होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार के इस कदम से कॉलेजों में छात्रों का एनरोलमेंट बढ़ेगा और पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी आने की उम्मीद है।
ये संस्थान नहीं है योजना में शामिल
बता दें कि यह योजना केवल रेगुलर कोर्स के लिए है। इसमें सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स या संस्थान, बिना सरकारी मदद वाले (अन-एडेड) संस्थान, पीपीपी (PPP) मोड पर चलने वाले संस्थान और प्रोफेशनल व टेक्निकल कोर्स को शामिल नहीं किया गया है।
32 लाख छात्रों को मिलेगा लाभ
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कैबिनेट ने इस स्कीम को सुचारू रूप से चलाने के लिए पहले साल में 895.57 करोड़ रुपये और अगले पांच सालों की अवधि के लिए कुल 5,467.55 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट को मंजूरी दी गई है। इस दूरगामी फैसले से स्कूल, मास एजुकेशन और हायर एजुकेशन विभागों के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों के लगभग 32 लाख छात्रों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
