Noida International Airport Jewar: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की वेबसाइट के अनुसार, भारत में कुल 487 हवाई अड्डे या हवाई पट्टियां हैं। इनमें से 137 हवाई अड्डों का प्रबंधन एएआई द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को दिल्ली के करीब उस एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी जो विश्व के एविएशन सेक्टर में भारत की शक्ति को मजबूत करने का काम करेगा। अब यह इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनकर तैयार है और 28 मार्च 2026 को इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उत्तर प्रदेश के जेवर में बनकर तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ना केवल भारत बल्कि एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दुनिया का चौथा और एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। साल 2017 में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जेवर में एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मई 2018 में इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को नोएडा एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी।यूपी के जेवर में नोएडा एयरपोर्ट को बनाने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। 5,845 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस एयरपोर्ट में एक साथ 178 विमान खड़े हो सकेंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कितना बड़ा है
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का आकार, रनवे और टर्मिनल इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से हैं। इसे चरणबद्ध तरीके से बहुत बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है, जिसे 6 रनवे के साथ तैयार किया गया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चार टर्मिनल बनाए जा रहे हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर 3 टर्मिनल हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आकार
- यह एयरपोर्ट लगभग 5,000–5,300 एकड़ जमीन में फैला हुआ है।
- भविष्य में विस्तार के साथ यह क्षेत्र और भी बढ़ सकता है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कितने रनवे हैं
- पहला चरण (Phase 1):
- 1 रनवे (लगभग 3,700 मीटर लंबा)
- कुल 6 रनवे तक विस्तार का मास्टर प्लान
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कितने टर्मिनल
- पहला चरण:
- 1 टर्मिनल (T1) – शुरुआती क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों/वर्ष
- कुल 4 टर्मिनल (T1 से T4) बनाए जाने की योजना
- अंतिम चरण तक क्षमता 7 करोड़+ यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है
एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) सिर्फ एक नया हवाई अड्डा नहीं, बल्कि भारत के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। जब यह पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तब यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में गिना जाएगा। यहां कुल 6 रनवे बनाए जाने की योजना है, जो इसे दुनिया के चुनिंदा मेगा एयरपोर्ट्स की श्रेणी में लाएगा।
भारत का “ग्रीन” एयरपोर्ट
नोएडा एयरपोर्ट को पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सोलर एनर्जी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और कार्बन न्यूट्रल ऑपरेशन जैसी सुविधाएं इसे भारत के सबसे ग्रीन एयरपोर्ट्स में शामिल करेंगी।

नोएडा एयरपोर्ट जेवर
कार्गो हब के रूप में बड़ी भूमिका
यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के सबसे बड़े कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में तेजी आएगी और उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा। एयरपोर्ट को एक साथ नहीं, बल्कि कई फेज में बनाया जा रहा है। पहले फेज़ में ही करोड़ों यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। यह एयरपोर्ट एक साथ नहीं बल्कि 4–5 चरणों में विकसित होगा। जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे नए रनवे और टर्मिनल जोड़े जाएंगे—यही वजह है कि इसे “भविष्य का मेगा एयरपोर्ट” कहा जाता है।
दिल्ली-NCR का दूसरा इंटरनेशनल गेटवे
यह एयरपोर्ट इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बाद NCR का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव काफी कम होगा। यह एयरपोर्ट सिर्फ फ्लाइट्स तक सीमित नहीं रहेगा। यहां से बुलेट ट्रेन, मेट्रो, एक्सप्रेसवे और रेल—चारों तरह की कनेक्टिविटी जोड़ी जाएगी, जिससे यह ट्रांसपोर्ट का बड़ा हब बनेगा।
