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NEET UG Counseling 2026: नीट काउंसलिंग में भूलकर भी न करें ये 5 कॉमन गलतियां, छोटी सी मिस्टेक और एडमिशन रेस से हो जाएंगे बाहर

NEET UG Counseling 2026: नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान छात्र अक्सर छोटी-छोटी गलती कर देते हैं, जिसके कारण वह एडमिशन की रेस से बाहर हो जाते हैं। इसलिए 5 बुनियादी बातों का ध्यान रखते हुए आप भी इस भारी मिस्टेक से बच सकते हैं।

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NEET UG Counseling 2026 (Photo- AI)

NEET UG Counseling 2026: नीट यूजी परीक्षा (NEET UG 2026) में सफलता हासिल करने के बाद अब सभी उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों का पूरा ध्यान काउंसलिंग प्रक्रिया पर है। एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों पर दाखिले के लिए काउंसलिंग के लिए रणनीति और सावधानी से भरा गया फॉर्म छात्रों को उनके सपनों के मेडिकल कॉलेज तक पहुंचा सकता है। वहीं इस दौरान एक छोटी सी गलती आपको आपके सपने से दूर भी कर सकती है। जी हां, अक्सर देखा गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए जब छात्र आवेदन फॉर्म भरते हैं तो अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं कि वह एडमिशन की इस रेस से बाहर हो जाते हैं। आइए जानते हैं उन प्रमुख गलतियों के बारे में जिनसे हर उम्मीदवार को बचना चाहिए -

गलत या अमान्य दस्तावेज अपलोड करना

काउंसलिंग के दौरान डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सबसे अहम और महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यदि आपका जाति प्रमाण पत्र, EWS या OBC-NCL सर्टिफिकेट लेटेस्ट और निर्धारित फॉर्मेट में नहीं है, तो आपका आरक्षण रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, अपने नाम, माता-पिता के नाम और जन्मतिथि की स्पेलिंग का मिलान 10वीं-12वीं की मार्कशीट से जरूर कर लें। अगर छात्रों को आवेदन फॉर्म में स्पेलिंग की गलती मिलती है तो उन्हें एक एफिडेविट सबमिट करना पड़ेगा।

चॉइस फिलिंग में लापरवाही

कॉलेजों की प्राथमिकता सूची भरते समय अक्सर छात्र गलतियां करते हैं। इसे भरने से पहले छात्रों को सलाह है कि वह अपनी ऑल इंडिया रैंक और पिछले सालों के कट-ऑफ को चेक करें। केवल चंद नामी कॉलेजों का चयन करने या बिना सोचे-समझे प्राथमिकता क्रम तय करने से अच्छी रैंक के बावजूद सीट हाथ से निकल सकती है। इसलिए सारी जानकारी के साथ उन संस्थानों का चयन करे जहां आपकी सीट पक्का होने की संभावना अधिक है।

अंतिम समय का इंतजार करना

अक्सर देखा गया है कि उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए रजिस्ट्रेशन, फीस भुगतान और चॉइस लॉकिंग के लिए दी गई समय-सीमा के आखिरी घंटों का इंतजार न करें। ऐसे में अंतिम समय में सर्वर डाउन या पेमेंट फेलियर जैसी तकनीकी समस्याओं के कारण कई बार फॉर्म सबमिट होने में दिक्कत होती है और इससे आप इस प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। इसलिए लास्ट मिनट पर फॉर्म सबमिट करने का जोखिम उठाने से बेहतर है कि आप समय रहते प्रक्रिया पूरी करें।

नियमों और आधिकारिक नोटिफिकेशन की अनदेखी

आवेदकों को बता दें कि ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा के नियम, बॉन्ड पॉलिसी और सीट अपग्रेडेशन की शर्तें अलग-अलग होती हैं। किसी की सुनी-सुनाई बातों में आने के बजाय मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और राज्य प्राधिकरणों द्वारा जारी इंफॉर्मेशन बुलेटन को खुद ध्यान से पढ़ें और उसके आधार पर अपने फॉर्म को भरें और सीट अपग्रेडेशन का ध्यान रखें। पूरी जानकारी के साथ ही आवेदन फॉर्म को भरने के रणनीति बनाएं और प्रिफरेंस भरें।

बंद या अमान्य संपर्क विवरण दर्ज करना

उम्मीदवारों को बता दें कि रजिस्ट्रेशन के दौरान मोबाइल नंबर और ईमेल ध्यान से भरे हैं, क्योंकि काउंसलिंग से जुड़े सभी ओटीपी (OTP), अलॉटमेंट मैसेज और जरूरी दिशा निर्देश रजिस्टर्ड फोन नंबर और ईमेल पर ही आते हैं। इसलिए फॉर्म में केवल वही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें जो पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान चालू रहे।

ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि आपकी एक छोटी सी गलती आपके भविष्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए ध्यान से और कई बार क्रॉस चेक कर प्रक्रिया पूरी करें।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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