आज के समय में अपनी वर्तमान नौकरी से नाखुश होकर या करियर में नए अवसरों की तलाश में बिना किसी दूसरी नौकरी के रिजाइन करना एक बड़ा फैसला साबित हो सकता है। कॉर्पोरेट जगत में काम का बढ़ता दबाव, टॉक्सिक वर्क कल्चर या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण से लोग अक्सर बिना किसी हैंड में जॉब ऑफर के ही इस्तीफा देने का जोखिम उठा लेते हैं। हालांकि, बिना नौकरी के लंबे समय तक घर बैठना मानसिक तनाव और वित्तीय संकट दोनों को बुलावा दे सकता है। ऐसे में बिना जॉब के रिजाइन करने का मन बना रहे हैं, तो घर बैठने से पहले अपने लिए एक मजबूत और पर्याप्त इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) तैयार करना सबसे पहली और जरूरी शर्त होनी चाहिए।
क्या होता है इमरजेंसी फंड?
इमरजेंसी फंड वह वित्तीय सुरक्षा कवच है जो आपको नौकरी जाने या छोड़ने के बाद बिना किसी आय के भी अपने जरूरी खर्चों को संभालने में मदद करता है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, नौकरी छोड़ने से पहले कम से कम 6 महीने से लेकर 1 साल तक के खर्चों के बराबर का फंड तैयार कर लेना चाहिए। इसमें आपके घर का किराया, ग्रॉसरी, बिजली और पानी के बिल, लोन की ईएमआई, बच्चों की फीस और स्वास्थ्य बीमा जैसे बुनियादी और अनिवार्य खर्च शामिल होने चाहिए। यदि आपके पास पहले से कोई बचत या निवेश है, तो उसे पूरी तरह से सुरक्षित और आसानी से निकाले जा सकने वाले विकल्पों जैसे लिक्विड म्यूचुअल फंड या बैंक की फिक्सड डिपॉजिट (FD) में ट्रांसफर कर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर पैसे तुरंत मिल सकें।
इन चीजों का रखें ध्यान
इसके अलावा, बजट की प्लानिंग करते समय अपने मौजूदा खर्चों की समीक्षा करना बेहद आवश्यक है। रिजाइन करने के बाद अपने सभी गैर-जरूरी और शौक वाले खर्चों पर तुरंत रोक लगा दें ताकि आपका इमरजेंसी फंड ज्यादा से ज्यादा समय तक चल सके। नौकरी छोड़ने के बाद कई बार नया जॉब मिलने में उम्मीद से ज्यादा समय लग जाता है, इसलिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। साथ ही, स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से बचने के लिए यह भी सुनिश्चित करें कि आपके और आपके परिवार के पास एकमुश्त हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हो, क्योंकि अचानक आने वाले मेडिकल खर्चे किसी भी बड़े से बड़े फंड को तेजी से खत्म कर सकते हैं। बिना किसी ठोस वित्तीय बैकअप के अचानक उठाया गया कदम आपके भविष्य को मुश्किल में डाल सकता है, इसलिए पूरी तैयारी और कैलकुलेशन के साथ ही यह बड़ा फैसला लें।
