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IRCTC की वेबसाइट, ऐप और RailOne सब फेल! दिवाली के लिए टिकट नहीं, यात्री बोले- आम आदमी का नंबर कब आएगा?

Diwali Train Ticket Booking Date and Time:यही हाल रेलवे के नए RailOne ऐप पर भी देखने को मिल रहा है। कई लोग लगातार लॉगिन और पेमेंट की कोशिश करते हैं, लेकिन टिकट बुक होने से पहले ही सीटें खत्म हो जाती हैं।

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'क्या एजेंट और दलाल सारे टिकट ले जाते हैं?'

दिवाली पर घर जाने की तैयारी कर रहे लाखों यात्रियों के लिए ट्रेन टिकट बुक करना इस बार भी किसी जंग से कम नहीं है। रेलवे लगातार दावा करता रहा है कि IRCTC की वेबसाइट पहले के मुकाबले तेज हुई है और टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ाई गई है, लेकिन जमीनी हकीकत का इससे कोई रिश्ता-नाता नहीं है। पिछले तीन दिनों से 5, 6 और 7 नवंबर की यात्रा के लिए टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे लोगों को बार-बार निराशा हाथ लग रही है।

वेबसाइट से लेकर ऐप तक, हर जगह परेशानी

यात्रियों की शिकायत है कि जैसे ही टिकट बुकिंग का समय सुबह 8 बजे शुरू होता है, IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भारी लोड का एरर दिखाई देने लगता है। यही हाल रेलवे के नए RailOne ऐप पर भी देखने को मिल रहा है। कई लोग लगातार लॉगिन और पेमेंट की कोशिश करते हैं, लेकिन टिकट बुक होने से पहले ही सीटें खत्म हो जाती हैं।

सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि जब तत्काल या सामान्य बुकिंग के शुरुआती समय में वेबसाइट पर 'High Load' का मैसेज दिखाई देता है, तो कुछ देर बाद सीटें फुल होने के बाद वेबसाइट आसानी से चलने लगती है। ऐसे में यात्रियों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर टिकट बुकिंग शुरू होते ही सिस्टम पर इतना ज्यादा लोड क्यों आ जाता है?

'क्या एजेंट और दलाल सारे टिकट ले जाते हैं?'

सोशल मीडिया पर यात्रियों का गुस्सा लगातार सामने आ रहा है। कई लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आम यात्री खुद टिकट बुक नहीं कर पा रहा है तो फिर एजेंटों और दलालों के पास टिकट इतनी आसानी से कैसे पहुंच जाता है? एक यात्री ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह आम मजदूर आदमी है और सुबह 8 बजे टिकट बुक करने की कोशिश करता है, लेकिन हर दिन हाई लोड का मैसेज आ जाता है। जब तक वेबसाइट सामान्य होती है, तब तक सीटें खत्म हो चुकी होती हैं। वहीं दूसरी तरफ दलाल तुरंत टिकट उपलब्ध कराने की बात करते हैं।

दिवाली पर घर जाना हुआ मुश्किल

दिवाली जैसे त्योहार पर घर जाना सिर्फ घूमने की बात नहीं होती। बड़ी संख्या में नौकरीपेशा, मजदूर और दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए ट्रेन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में टिकट न मिलना उनके लिए महज ऑनलाइन तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि परिवार से मिलने की मजबूरी के बीच बड़ी परेशानी बन जाती है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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