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Reservation in PhD: इतिहास में पहली बार पीएचडी प्रवेश में आरक्षण की शुरुआत

Reservation in PhD Admission: भारतीय प्रबंधन संस्थान, IIM अहमदाबाद ने इतिहास में पहली बार पीएचडी प्रवेश में आरक्षण की शुरुआत की है। प्रीमियर बी-स्कूल डॉक्टरेट कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ विकलांग उम्मीदवारों के लिए सीटों के आरक्षण को लागू करेगा।

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आईआईएम अहमदाबाद आरक्षण (Image Credit - Meta AI)

IIM Ahmedabad Introduces Reservation in PhD Admissions: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद ने पीएचडी कोर्सेज में एडमिशन में कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। जाहिर है इस निर्णय का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ विकलांग उम्मीदवारों को देश के शीर्ष बिजनेस स्कूल की ओर से मैनेजमेंट डॉक्टरेट प्रोग्राम (या मैनेजमेंट में फेलो कार्यक्रम) के लिए सक्षम बनाने में मदद करना है।

कोटा सिस्टम कैसे लागू होगा, अभी इसमें और डिटेल आना बाकी है, जल्द ही सूचना जारी की जा सकती है। ऑनलाइन नोटिस में बताया गया है कि "एडमिशन के दौरान आरक्षण को लेकर भारत सरकार के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा।"

क्यों लिया गया यह फैसला, Reservation Policy in PhD Admission

यह कदम गुजरात उच्च न्यायालय में IIM अहमदाबाद की मौखिक टिप्पणियों के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि 2025 से आरक्षण मिलेगा। 62 इस कदम के बाद यदि कोई उम्मीदवार अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी)/विकलांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी)/गैर-क्रीमी अन्य पिछड़ा वर्ग (एनसी-ओबीसी)/आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से है तो न्यूनतम पात्रता वाली डिग्री में 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी जाएगी।

दायर हुई थी याचिका, Reservation in IIM Ahmedabad

Global IIM Alumni Network ने गुजरात उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की। इसने IIMA के पीएचडी कार्यक्रमों में आरक्षण लागू करने की मांग की गई। जनहित याचिका में कहा गया है कि 1971 में शुरू हुए आईआईएमए में पीएचडी कार्यक्रम में आरक्षण न देना संवैधानिक प्रावधानों, केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) या सीईआरए अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदंडों का “घोर उल्लंघन” है।

आईआईएम अहमदाबाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार, प्रबंधन में डॉक्टरेट कार्यक्रम में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) या CAT के बदले में एक मानक परीक्षा देनी होती है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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