How vice president elected in india: स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए भारत के उप राष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar (जगदीप धनखड़) ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उप राष्ट्रपति अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को देता है, उसकी मंजूरी के बाद ही त्यागपत्र को स्वीकार किया जाता है। जब से जगदीप धनखड़ से अपना पद छोड़ा है, देशभर में इस पर चर्चा हो रही है, भारत का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा, भारत के उप राष्ट्रपति चुने जाने का प्रोसेस क्या होता है? जब तक उपराष्ट्रपति की जगह नहीं भरती तब तक राज्यसभा कौन संभालेगा? आदि। चलिए इस लेख के माध्यम से आपके इन सवालों का जवाब देने की कोशिश करते हैं।
सबसे पहला सवाल जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा क्यों दिया?
भारत के उप राष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar (जगदीप धनखड़) स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना पद छोड़ने के लिए त्यागपत्र दे दिया।
उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू को दिए त्यागपत्र में इस बात का जिक्र किया कि - "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं।"

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव
कब से थे वे इस पद पर और कब खत्म हो रहा था कार्यकाल
Jagdeep Dhankhar (जगदीप धनखड़) अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति के रूप में सेवा दे रहे थे, वैसे तो उनका कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते और खुद का ख्याल रखने के लिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा छोड़ना सही लगा। बता दें, Jagdeep Dhankhar की दिल्ली एम्स में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस साल वे कुछ समय तक अस्पताल में भर्ती भी रहे थे।
कब होगा नए उपराष्ट्रपति का चुनाव?
Jagdeep Dhankhar का कार्यकाल 2027 तक था, अब इतनी लंबे समय तक पद को खाली नहीं छोड़ा जा सकता है, ऐसे में चुनाव का आयोजन किया जाएगा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड 2 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद भरने के लिए चुनाव का आयोजन जल्द से जल्द कराना होता है। यहां एक बात समझने की जरूरत है, जगदीप धनखड़ ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से इस्तीफा दे दिया, ऐसे में जिस व्यक्ति का अगले उप राष्ट्रपति के तौर पर चुनाव होगा, वो 2027 तक इस पद पर नहीं सेवा देगा, बल्कि नए उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने वाले दिन से अगले पांच साल तक के लिए इस पद पर रह सकता है।

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव
एक और बात मान लीजिए कोई उप राष्ट्रपति अपने कार्यकाल को पूरा कर लेता है, तो भी उसे तुरंत अपना पद छोड़ने की जरूरत नहीं होती है, नियम के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वह तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक कि उनका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले। अब रहीं बात कैसे होगा उपराष्ट्रपति का चुनाव?
भारत का उपराष्ट्रपति बनने के लिए किन योग्यताओं का होना है जरूरी?
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए। ये पद भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। इनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।
- इस पद के लिए उम्मीदवार कम से कम 35 वर्ष पूरा कर चुका हो
- उम्मीदवार राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए योग्य हो।
- उम्मीदवार भारत सरकार या राज्य सरकार या किसी अधीनस्थ स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई लाभ का पद धारण न करता हो।

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव
उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
भारत के संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है। इस प्रोसेस में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी वरीयता के क्रम में रैंक करते हैं। वे अपनी पहली, दूसरी, तीसरी, और अन्य पसंदों को भी चुनते हैं। इन मतदाताओं में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं।
इस चुनाव में मनोनीत सदस्य भी हिस्सा लेते हैं, जबकि राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा सांसद और सभी राज्यों की विधानसभा के विधायक वोटिंग करते हैं।
ऐसे चुनते हैं उपराष्ट्रपति
स्टेप-1 चुनाव की अधिसूचना जारी होना निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना में नामांकन, मतदान और परिणाम की तारीखें होती हैं।
स्टेप-2: नामांकन प्रक्रिया उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 20 सांसदों द्वारा समर्थक के रूप में हस्ताक्षर के साथ नामांकन पत्र दाखिल करना होता है।
स्टेप-3 सांसदों के बीच प्रचार होता है केवल सांसद मतदाता होते हैं। इसलिए यह प्रचार सीमित दायरे में होता है। उम्मीदवार और उनके समर्थक दल प्रचार में शामिल होते हैं।
स्टेप-4 मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी हर सांसद मतपत्र पर प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम में (1, 2, 3...) अंकित करता है।
स्टेप-5: मतों की गिनती और परिणाम जीत के लिए कुल वैध मतों का साधारण बहुमत (50% से अधिक) प्राप्त करना होता है। रिटर्निंग ऑफिसर नतीजे की घोषणा करते हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए देनी होती है जमानत
उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवार को 15000 रुपये बतौर जमानत राशि निर्वाचन आयोग के पास जमा करने होते हैं। यदि उम्मीदवार चुनाव हार जाता है तो यानी कुल वैध मतों का छठा हिस्सा (1/6) भी नहीं मिलता, तो यह जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। केवल वही उम्मीदवार अपनी जमानत वापस पाने के हकदार होते हैं, जिन्हें न्यूनतम तय वोट मिलते हैं।
