RJD सांसद मनोज झा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सरकार की आलोचना की और इसे 'डॉग व्हिसलिंग' (खास वोट बैंक को साधने की चाल) करार दिया। उनकी यह टिप्पणी अमित शाह के उस ऐलान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि BJP के नेतृत्व वाले NDA के 21 राज्य 2029 से पहले UCC लागू करेंगे।
झा ने कहा कि कई अहम मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है और आरोप लगाया कि सरकार UCC का इस्तेमाल उन मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है।
UCC पर मनोज झा ने कहा- 'मोहन भागवत हाल ही में विदेश दौरे पर थे; अमेरिका या इंग्लैंड में उन्होंने कहा था कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है। अमित शाह ने भी यह देखा होगा। अमित शाह को संविधान सभा में आर्टिकल 44 पर हुई बहस-जिसे बाद में बदला गया और लॉ कमीशन की रिपोर्ट के बारे में भी जानकारी होगी...
असली मुद्दों से ध्यान भटकाना
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगारी और आय की असमानता जैसे गंभीर और जरूरी मुद्दों को हल करने में विफल रही है, इसलिए जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषयों को उठाया जा रहा है। विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन कर रहे युवा रोजगार और एक ईमानदार व निष्पक्ष व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, न कि समान नागरिक संहिता की।
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UCC पर अमित शाह का बड़ा ऐलान!
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि कई राज्यों में इसे पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी राज्यों में भी इसे लागू करने को लेकर उन्हें पूरा भरोसा है। अमित शाह ने कहा, 'हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है। मुझे विश्वास है कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र और बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है।
क्या है UCC
समान नागरिक संहिता (UCC) का मतलब ऐसे समान व्यक्तिगत कानून से है, जो धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों के बजाय सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो। इसके दायरे में मुख्य रूप से शादी, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानून आते हैं। यूसीसी लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में शामिल रहा है। उत्तराखंड इसे लागू करने वाला पहला राज्य बना था। इसके बाद कई अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने या इसकी दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
