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Explained: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की अब नहीं चलेगी मनमानी, नया कानून लागू, जानें क्या है दिल्ली स्कूल फीस अधिनियम

Delhi School Fee Regulation Bill 2025: दिल्ली सरकार ने स्कूलों के मनमानी फीस वसूली करने को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। इस कानून के लागू होते ही राजधानी के करीब 1500 से अधिक प्राइवेट स्कूल इसके दायरे में आ गए है। अब फीस से जुड़े हर मामले की निगरानी कड़े नियमों के अंतर्गत होगी। ऐसे में यहां आप जान सकते हैं कि क्या है दिल्ली स्कूल फीस रेगुलेशन बिल।

Delhi School Fee Regulation Bill 2025

Delhi School Fee Regulation Bill 2025: क्या है दिल्ली स्कूल फी रेगुलेशन बिल 2025

Delhi School Fee Regulation Bill 2025: दिल्ली में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर लंबे समय से अभिभावकों में असंतोष बना (Delhi School Fee Act) हुआ था। कई प्राइवेट स्कूल हर साल बिना कारण बताए फीस बढ़ा देते थे, जिससे सामान्य परिवारों को अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो गया था। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विधानसभा ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 पारित किया था। वहीं अब कुछ महीनों बाद दिल्ली सरकार के उपराज्यपाल वी.के सक्सेना द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी कर विधेयक को आधिकारिक रूप से अधिनियम के रूप में लागू कर दिया गया है। इस कानून के लागू होते ही राजधानी के करीब 1500 से अधिक प्राइवेट स्कूल इसके दायरे में आ गए है। अब फीस से जुड़े हर मामले की निगरानी कड़े नियमों के अंतर्गत होगी।

बता दें यह विधेयक दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अगस्त 2025 में पेश किया था, जब अप्रैल में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी के विरोध में महीनों तक व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। ऐसे में यहां आप जान सकते हैं कि क्या है दिल्ली स्कूल फीस अधिनियम, दिल्ली स्कूल फीस नियम विधेयक क्या है? यहां आप विस्तार से जान सकते हैं।

Delhi School Fee Regulation Bill 2025: क्या है दिल्ली स्कूल फीस अधिनियम

इस नए कानून के तहत तीन स्तर की निगरानी व्यवस्था होगी, जिसमें स्कूल लेवल फी रेगुलेशन कमेटी, डिस्ट्रिक्ट लेवल फीस अपीलेट कमेटी और रिवीजन कमेटी शामिल होगी। स्कूल स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी का कार्य फीस निर्धारण की निगरानी करना होगा। साथ ही जिला स्तर पर फीस अपीलेट कमेटी में अभिभावक स्कूलों में फीस को लेकर अपील कर सकेंगे। वहीं रिवीजन कमेटी का मतलब है कि किसी भी फीस विवाद की सुनवाई अब तीन स्तर पर होगी। स्कूल के खिलाफ फीस को लेकर शिकायत दर्ज करवाने के लिए कम से कम 15 पर्सेंट अभिभावकों का समर्थन जरूरी होगा। ध्यान रहे बिना किसी नोटिस या अनुमति के स्कूल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकता है। स्कूल केवल वही फीस ले सकता है जो स्पष्ट रूप से तय होगी।

Delhi New School Fee Law: फी रेगुलेशन कमेटी का कार्य

दिल्ली स्कूल फीस रेगुलेशन व्यवस्था में पहले स्तर पर सभी प्राइवेट विद्यालयों के लिए प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई तक विद्यालय स्तरीय फी रेगुलेशन कमेटी का गठन करना अनिवार्य होगा। विद्यालय प्रबंधन द्वारा नामित व्यक्ति की अध्यक्षता में गठित इस समिति में विद्यालय के प्रधानाचार्य और सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा इसमें अभिभावक शिक्षक संघ से लॉटरी के जरिए चुने गए पांच अभिभावक, विद्यालय के तीन शिक्षक और शिक्षा निदेशक द्वारा नामित एक सदस्य शामिल होंगे, जो समिति के पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करेंगे। विधेयक में यह भी कहा गया है कि इन सदस्यों में से कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) या सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग से होना चाहिए और कम से कम दो सदस्य महिलाएं होनी चाहिए। इस समिति को 15 अगस्त से पहले बैठक कर आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल द्वारा प्रस्तावित फीस को सर्वसम्मति से स्वीकृत करना होगा, जिसे अगले तीन वर्षों तक बदला नहीं जा सकेगा।

Delhi School Fee Regulation Bill: डिस्ट्रिक्ट लेवल फीस अपीलेट कमेटी

वहीं इसका अगला स्तर डिस्ट्रिक्ट लेवल फीस अपीलेट कमेटी है, जो शिकायतों के निवारण के लिए जिम्मेदार होगी। दिल्ली के प्रत्येक जिले में एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के शिक्षा उप निदेशक (DoE) करेंगे और इसमें क्षेत्रीय DoE भी सदस्य सचिव के रूप में शामिल होंगे। इस समिति में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट या जिला लेखा अधिकारी, स्कूल के दो प्रतिनिधि और अभिभावकों के दो प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए।

Delhi School Fee Act: रिवीजन कमेटी का आदेश मानना अनिवार्य

दिल्ली स्कूल फीस रेगुलेशन व्यवस्था में तीसरा और अंतिम स्तर रिवीजन कमेटी का होगा। इस समिति का गठन राज्य स्तर पर किया जाएगा ताकि पूरे सिस्टम पर एक समान और कड़ी निगरानी रखी जा सके। इस समिति के सदस्यों में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, लेखा नियंत्रक/उप नियंत्रक, विद्यालयों का एक प्रतिनिधि, अभिभावकों का एक प्रतिनिधि और शिक्षा विभाग का एक अतिरिक्त प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस समिति का अध्यक्ष शिक्षा क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने वाले एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। इस कमेटी द्वारा पारित किए गए आदेशों को मानना अनिवार्य होगा। यह आदेश तीन वर्ष की अवधि के लिए लागू रहेंगे, जो पहले स्तर पर निर्धारित शुल्क परिवर्तन की समय सीमा के समान होगी। इसका मतलब है कि तीन साल तक उसी फी स्ट्रकचर को लागू किया जाएगा।

Delhi School Fee Rule: नियम का उल्लंघन करने पर लाखों का जुर्माना

इस नए विधेयक के जरिए प्राइवेट स्कूलों पर फीस बढ़ोत्तरी को लेकर नकेल कसा गया है। यदि कोई स्कूल पहली बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर एक लाख से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों को शुरुआत से ही नियमों का पालन करने के लिए सचेत करना है। वहीं अगर कोई स्कूल बार बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में जुर्माने की राशि दोगुनी हो जाएगी यानी 2 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना होगा।

Delhi School Fees New Act: इस स्थिति में हो सकती है स्कूल की मान्यता रद्द

इसके अलावा यदि कोई स्कूल लंबे समय तक नियमों का पालन नहीं करता है तो शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों की मान्यता को निलंबित या पूरी तरह रद्द कर सकता है। इतना ही नहीं स्कूल के फीस बढ़ाने या उसमें बदलाव करने के अधिकार पर रोक लगाई जा सकती है। गंभीर स्थिति में शिक्षा विभाग को स्कूल का प्रबंधन अपने नियंत्रण में लेने का भी अधिकार होगा।

वहीं अब कोई स्कूल फीस न जमा होने पर छात्रों की परीक्षा या परीक्षा परिणाम नहीं रोक सकेंगे। साथ ही इस स्थिति में कोई भी स्कूल छात्र का नाम स्कूल के एडमिशन लिस्ट से हटाना या उसे कक्षा की गतिविधियों में भाग लेने से नहीं रोक सकेंगे। यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर प्रति छात्र 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

आदित्य सिंह
आदित्य सिंह author

आदित्य सिंह टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में एजुकेशन सेक्शन पर लिखते हैं। मीडिया में 5 साल का अनुभव रखने वाले आदित्य सिंह स्कूली शिक्षा से लेकर प्र... और देखें

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