Students Demand Grace Marks : CBSE के रिजल्ट के बाद से शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी देखने, फिर री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी और उसके बाद तकनीकी दिक्कतों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, इंस्टाग्राम और अन्य मंचों पर एक नई मांग तेजी से ट्रेंड कर रही है, हर विषय में 20-20 अंक ग्रेस मार्क्स दिए जाएं।
हजारों छात्र पोस्ट कर रहे हैं कि जब पूरी प्रक्रिया में लगातार तकनीकी परेशानियां सामने आ रही हैं, तो इसका खामियाजा छात्रों को क्यों भुगतना पड़े ?
कई छात्रों का कहना है कि कभी पोर्टल अपडेट, कभी सर्वर की समस्या और कभी आवेदन प्रक्रिया में बदलाव ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया है। ऐसे में सभी छात्रों को समान रूप से अतिरिक्त अंक देने की मांग जोर पकड़ रही है।

ग्रेस मार्क्स की मांग
ग्रेस मार्किंग क्या होती है?
CBSE में ग्रेस मार्क्स कोई नई व्यवस्था नहीं है। बोर्ड कुछ विशेष परिस्थितियों में सीमित संख्या में ग्रेस अंक देता है ताकि कोई छात्र बेहद कम अंतर से फेल न हो जाए। लेकिन यह व्यवस्था सभी छात्रों को एक समान अंक देने के लिए नहीं होती। ग्रेस मार्किंग का उद्देश्य केवल योग्य छात्रों को पास होने में सहायता देना होता है, न कि सभी के कुल अंक बढ़ाना।

पोर्टल ना खुलने से परेशान हुए छात्र
क्या 20-20 अंक सभी को मिल सकते हैं ?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संभावना बेहद कम है। CBSE की मूल्यांकन प्रणाली तय नियमों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रक्रिया पर आधारित है। यदि सभी छात्रों को प्रत्येक विषय में 20 अंक अतिरिक्त दिए जाते हैं तो इससे पूरे परिणाम की विश्वसनीयता, मेरिट लिस्ट, कॉलेज एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी समस्याएं और मूल्यांकन प्रक्रिया दो अलग-अलग विषय हैं। यदि किसी छात्र को मूल्यांकन में गलती लगती है तो उसके लिए री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन जैसी व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
पिछले कई दिनों से CBSE से जुड़े विवाद लगातार सुर्खियों में हैं। उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच, पोर्टल अपडेट, साइबर सुरक्षा से जुड़ी चर्चाएं और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी ने छात्रों के बीच असंतोष पैदा किया है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में छात्र सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और ग्रेस मार्किंग को समाधान के रूप में पेश कर रहे हैं।
बोर्ड छात्रों की चिंताओं को देखते हुए आवेदन की समय-सीमा बढ़ा सकता है, तकनीकी समस्याओं का समाधान तेज कर सकता है या जरूरत पड़ने पर विशेष राहत संबंधी कदम उठा सकता है। लेकिन सभी छात्रों को हर विषय में 20 अंक देने जैसा फैसला फिलहाल व्यावहारिक और नियमों के अनुरूप नहीं माना जा रहा है।
