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'किसी को कुछ ही दिनों में ज़मानत मिल जाती है, तो कोई 6 साल तक इंतजार करता है'; स्वतंत्र को जमानत मिलने पर बोले दिपके

स्वतंत्र भारद्वाज को अंतरिम जमानत मिलने के बाद दिपके ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक को दिनों में बेल मिल जाती है तो दूसरा 6 साल से इंतजार कर रहा है।

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अभिजीत दिपके और स्वतंत्र भारद्वाज (फाइल फोटो)

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली की एक अदालत के उस फैसले की आलोचना की है जिसमें हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj Bail) को जमानत दी गई है। भारद्वाज का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह एक प्रदर्शनकारी छात्र के पिता के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे थे।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार को दिल्ली की अदालत के उस फैसले पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को ज़मानत दी गई। भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे एक छात्र के पिता पर हमला करने की बात खुद स्वीकार की थी। CJP नेता ने कहा कि जहां एक तरफ कैमरे में पकड़े जाने के बावजूद किसी को कुछ ही दिनों में जमानत मिल जाती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग बिना किसी ट्रायल या सुनवाई के छह साल तक जेल में सड़ते रहते हैं।

X पर दिपके ने कहा, 'कैमरे में पकड़े जाने के बावजूद किसी को कुछ ही दिनों में जमानत मिल जाती है। वहीं कुछ लोग बिना किसी ट्रायल या सुनवाई के छह साल तक जेल में सड़ते रहते हैं। न्याय प्रणाली एक ही है, लेकिन रवैया बहुत अलग है।'

हालाँकि दिपके ने स्वतंत्र को जमानत मिलने की तुलना करते हुए सीधे तौर पर यह नहीं बताया कि वे किन 'दूसरों' की बात कर रहे थे, लेकिन ऐसा लगता है कि उनका इशारा छात्र एक्टिविस्ट (उमर खालिद) की ओर हो सकता है, जो 2020 के दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद हैं। उमर खालिद 13 सितंबर, 2020 से जेल में हैं।

स्वतंत्र भारद्वाज को 3 हफ़्ते की अंतरिम जमानत

इससे पहले आज, दिल्ली की एक अदालत ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक छात्र एक्टिविस्ट के पिता के साथ कथित मारपीट और अन्य आरोपों के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ़्ते की अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि भारद्वाज की नियमित जमानत याचिका पर फ़ैसला तीन हफ़्ते तक उनके आचरण को देखने के बाद ही लिया जाएगा।

'इतने समय में उसे सोचने-समझने का मौका मिल जाना चाहिए था'

जज ने कहा, 'सभी हालात पर विचार करते हुए, कोर्ट ने यह ध्यान में रखा है कि याचिकाकर्ता (भारद्वाज) दस दिन से कुछ ज़्यादा समय से हिरासत में है, और इतने समय में उसे सोचने-समझने का मौका मिल जाना चाहिए था।' उन्होंने कहा कि भारद्वाज से हिरासत में पूछताछ पूरी हो चुकी है और जिन अपराधों का आरोप है, उनमें ज़्यादा से ज़्यादा सात साल की सज़ा हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा मुख्य चिंता है, जिसे सही शर्तें लगाकर सुनिश्चित किया जा सकता है।

'घटना के बारे में जो भी फैसला होना है, वह कोर्ट में सबूतों के आधार पर होना चाहिए'

कोर्ट ने कहा, 'पीड़ित की सुरक्षा और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत आज़ादी की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि याचिकाकर्ता को कड़ी शर्तों के साथ तीन हफ़्ते की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।' 'उस दौरान उसके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी और उसी के आधार पर उसकी रेगुलर जमानत की अर्जी पर विचार किया जाएगा। 23 जून, 2026 की घटना के बारे में जो भी फैसला होना है, वह कोर्ट में सबूतों के आधार पर होना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से या सोशल मीडिया पर।'

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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