CBSE ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया अपने नए OSM (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) प्लेटफॉर्म पर शुरू कर दी है। बोर्ड का दावा है कि यह नया सिस्टम पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी है। सूत्रों के मुताबिक, नया पोर्टल शुरुआती दौर में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और री-इवैल्यूएशन का काम सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है। इस प्लेटफॉर्म को IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों के सहयोग से विकसित किया गया है। इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष साइबर सुरक्षा परीक्षण भी किए गए, जिनमें किसी बड़ी तकनीकी खामी का पता नहीं चला।
CBSE के आंकड़ों के अनुसार, 2 जून से 7 जून के बीच 1.60 लाख से अधिक छात्रों ने अंकों के सत्यापन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया। इन छात्रों ने कुल 3.8 लाख से ज्यादा उत्तरों की दोबारा जांच की मांग की है। इससे पहले मई में 4 लाख से अधिक छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था।
नए OSM सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि री-इवैल्यूएशन करने वाले परीक्षकों को केवल वही उत्तर दिखाई दे रहे हैं, जिन पर छात्रों ने आपत्ति दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, जांच के दौरान शिक्षक पहले दिए गए अंक भी नहीं देख सकते, जिससे मूल्यांकन को अधिक निष्पक्ष बनाने की कोशिश की गई है। कई मामलों में एक ही उत्तर की जांच एक से अधिक विशेषज्ञों से कराई जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल व्यवस्था भविष्य में CBSE के लिए पूरी तरह स्वतंत्र और स्वदेशी मूल्यांकन प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
हालांकि, इस बीच कुछ छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें अभी तक अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त नहीं हुई हैं। कई छात्रों का कहना है कि कॉपियां देर से मिलने के कारण वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं। फिलहाल CBSE ने इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।
नए OSM प्लेटफॉर्म के जरिए CBSE देश की सबसे बड़ी बोर्ड परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब छात्रों और अभिभावकों की नजरें इस बात पर हैं कि यह नई व्यवस्था परिणामों में कितना भरोसा और संतुष्टि पैदा कर पाती है।
