CBSE New Marking Scheme Controversy: देश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच बेहद असमंजस का माहौल है। एक तरफ NEET पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के विवाद ने लाखों छात्रों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, तो दूसरी ओर सीबीएसई की नई मार्किंग स्कीम को लेकर देशभर में घमासान मचा हुआ है।
छात्रों का कहना है कि ऑन स्क्रीम मार्किंग सिस्टम के कारण रिजल्ट और मेरिट पर बड़ा असर पड़ा है। सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों और स्कूलों में इस पर बहस छिड़ी हुई है। ज्यादातर छात्र अपने मार्क्स से असंतुष्ट हैं। इतना ही नहीं पिछले 6 साल में सीबीएसई बोर्ड 12वीं का रिजल्ट सबसे कम दर्ज किया गया है। बता दें वर्ष 2021 में पास पर्सेंटेज 99.37%, 2022 में 92.71 फीसदी, 2023 में 87.33%, 2024 में 87.98%, 2025 में 88.39 फीसदी और 2026 पास प्रतिशत 85.20 पर्सेंट दर्ज किया गया है।
बोर्ड ने ट्वीट कर इस पर अपनी सफाई दी थी, लेकिन छात्रों व अभिभावकों का विरोध अभी जारी है। ऐसे में बोर्ड आज यानी 17 मई 2026, रविवार को दो प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करने जा रहा है। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस सुबह 11 बजे Central Board of Secondary Education के द्वारका स्थित मुख्यालय में हुई, जबकि दूसरी दोपहर 12:30 बजे Ministry of Education में हुई।
CBSE Press Conference: बोर्ड के अध्यक्ष ने प्रेस कांफ्रेंस में क्या कहा
विद्यालय शिक्षा सचिव संजय कुमार और सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह कक्षा 12 के छात्रों द्वारा उठाए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग संबंधी मुद्दों पर जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग स्कीम को लेकर बच्चों में बहुत बेचैनी और परेशानी है। पास परसेंटेज घटा है ऐसा बच्चो को लग रहा है। हम स्पष्ट करना चाहेंगे यह पहली बार नहीं है 2014 में OSM की शुरुआत की गई थी। इस साल फिर से हमने इंट्रोड्यूस किया है। OSM विदेशोव में भी technology के मध्यम से किया जाता है, बहुत जगहों पर इस तरह की मार्किंग होती है।
Re- Evaluation का प्रावधान हमेशा से CBSE में रहा है, बच्चे करा सकते है। उन्होंने कहा कि हम पारदर्शिता के साथ चेक करेंगे। बच्चों की पेरेंट्स की चिंता हम समझते है।
क्या OSM बना सीबीएसई 12वीं में कम मार्क्स की वजह
बता दे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board Of Secondary Education) की ओर से 12वीं में पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियों की जांच की गई, जिसमें परीक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को ऑनलाइन चेक कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि नई प्रणाली में स्टेप मार्किंग और प्रजेंटेशन के बजाय सीधे उत्तर की गुणवत्ता पर ज्यादा फोकस किया गया। इसके अलावा CBSE ने इस बार competency-based और analytical questions की संख्या भी बढ़ाई थी। इससे रटकर पढ़ने वाले छात्रों को नुकसान हुआ। वहीं कई शिक्षकों का कहना है कि फिजिक्स और गणित का पेपर अपेक्षाकृत कठिन था। 2 साल से लगातार पेपर कंपटीशन को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं जो पहले के मुकाबले कठिन हैं। रिजल्ट कम आने का यह भी सबसे बड़ा कारण है।
सीबीएसई ने ट्वीट कर दी थी सफाई
हालांकि बीते दिनों CBSE ने स्पष्ट किया कि OSM प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखना है। बोर्ड ने ट्वीट कर कहा कि वह निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी और समान मूल्यांकन प्रणाली बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। CBSE के मुताबिक, बोर्ड की सभी मूल्यांकन प्रक्रियाएं मजबूत और पारदर्शी नियमों के तहत संचालित की जाती हैं ताकि छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें। बोर्ड के अनुसार, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए परीक्षकों को स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग करनी होती है, जिससे हर उत्तर का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके। CBSE ने कहा कि यह प्रणाली लंबे समय से बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और इससे अलग-अलग क्षेत्रों तथा विषयों में अंक देने की प्रक्रिया अधिक वस्तुनिष्ठ बनी है।
रीचेकिंग का विकल्प मौजूद
साथ ही रीचेकिंग को लेकर बोर्ड ने कहा कि, यदि किसी छात्र को अपने प्राप्त अंकों को लेकर किसी प्रकार का कोई संदेह होता है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उत्तर पुस्तिका के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि इस पर सोशल मीडिया पर छात्रों की अलग अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
छात्र और पैरेंट्स ट्वीटर पर दे रहें अपनी प्रतिक्रिया
कुमार विक्रम नाम के एक यूजर ने बोर्ड को कमेंट करते हुए लिखा कि, प्रिय सीबीएसई, लेकिन पुनर्मूल्यांकन के अंक आने तक कॉलेजों में प्रवेश का समय बीत चुका होगा। एक महीने बाद अगर छात्र को पता चलता है कि उसे अधिक अंक मिले हैं तो उन अंकों का क्या फायदा? अगर इतने सारे छात्र इस समस्या का जिक्र कर रहे हैं तो इसका कोई कारण जरूर होगा।
वहीं ट्विटर यूजर अनु ने कमेंट करते हुए लिखा कि, पुनर्जांच शुल्क माफ कर दीजिए। कम से कम आप लोग इतना तो कर ही सकते हैं।
Rohit Koshie नाम के यूजर ने लिखा अगर आपको OSM की अचूकता पर इतना भरोसा है, तो आपको इसकी मूल्यांकित प्रति मांगने वाले हर किसी को मुफ्त में देनी चाहिए, न कि इसके लिए 500-700 रुपये वसूलने चाहिए। कथनी और करनी में समानता रखें, वरना नौकरी छोड़ दें! ऐसे और भी लोग होंगे जो बच्चों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझेंगे!!!
@shubham idle लिखते हैं कि, अपनी प्रतियां मांगना हमारा अधिकार है, यह कोई "हमने तुम पर एहसान किया" वाली बात नहीं है।
जांच के लिए नियुक्त 70,000 शिक्षकों में से 90% से अधिक कंप्यूटर में कुशल नहीं हैं और आप उम्मीद करते हैं कि एक दिन के प्रशिक्षण से वे विशेषज्ञ बन जाएंगे। क्या आपने इस वर्ष के परिणाम की तुलना पिछले वर्ष के परिणामों से की है?
वहीं @TheAnuragTyagi नाम के यूजर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि बोर्ड से अनुरोध किया कि, कम अंक पाने वाले सभी छात्रों को *उत्तर पुस्तिकाओं की मुफ्त प्रति* दें।
2. *पुनः प्रश्नपत्रों की जांच हाथ से करें*, कंप्यूटर से नहीं।3. *गलती करने वाले का पता लगाएं* और कार्रवाई करें।
4. *छात्रों का भविष्य बचाएं* ताकि उनका कॉलेज में प्रवेश बर्बाद न हो।
कृपया हमारी मदद करें। कई छात्रों का भविष्य इस पर निर्भर करता है। हमें विश्वास है कि सीबीएसई सही कदम उठाएगा।
सीबीएसई आज करेगा दो प्रेस कांफ्रेंस
सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक लगातार बवाल के बाद बोर्ड आज ठीक दो प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करने जा रहा है। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस सुबह 11 बजे Central Board of Secondary Education के द्वारका स्थित मुख्यालय में होगी, जबकि दूसरी दोपहर 12:30 बजे Ministry of Education में होगी, जिसमें शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार मीडिया को संबोधित करेंगे।
